छत्तीसगढ़: अबूझमाड़ के Naxal 15 Oct तक सशस्त्र संघर्ष समाप्त करेंगे
रायपुर । संवाददाता: अबूझमाड़ क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों ने 15 अक्टूबर 2025 तक सशस्त्र संघर्ष समाप्त करने की घोषणा की है. यह बयान हाल ही में विभिन्न माओवादी समितियों द्वारा जारी बयानों की श्रृंखला के बाद सामने आया है. इस बार यह घोषणा मा़र्ह डिवीजनल कमेटी की सचिव सनीता के नाम से जारी की गई है, जिसमें पोलित ब्यूरो सदस्य सोनू उर्फ अभय की हिंसा त्यागने और मुख्यधारा में लौटने की अपील का समर्थन किया गया है.
मंगलवार को जारी इस बयान में माओवादियों ने दशकों पुराने सशस्त्र संघर्ष को समाप्त करने का निर्णय लिया और कहा कि 15 अक्टूबर 2025 तक सभी सशस्त्र गतिविधियाँ पूरी तरह बंद कर दी जाएंगी. मा़र्ह डिवीजनल कमेटी द्वारा 4 अक्टूबर की तारीख वाला आधिकारिक बयान जारी किया गया, जिसमें इस संक्रमण काल के दौरान किसी भी प्रकार की सरकार-विरोधी या हिंसक कार्रवाई न करने का आश्वासन दिया गया है.
बयान में केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार से यह अपील भी की गई है कि प्रक्रिया के शांतिपूर्ण समापन के लिए पुलिस और अर्धसैनिक अभियानों को अस्थायी रूप से रोका जाए.
इस पर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने कहा, “वर्तमान में माओवादी आंदोलन अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है. दिशा, उद्देश्य और अस्तित्व-तीनों पर संकट है. बचे हुए कैडरों के पास अब केवल एक मानवीय विकल्प बचा है, हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करना. शीर्ष नेताओं बासवराजू, सुधाकर, कोसा और रामचंद्र रेड्डी के मारे जाने से माओवादी संगठन को निर्णायक और अपूरणीय झटका लगा है.”
यह घटनाक्रम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयान के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि माओवादियों को मार्च 2026 तक हथियार डालने होंगे, अन्यथा तीव्र होती कार्रवाइयों में वे पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे.
माढ़ डिवीजनल कमेटी की सचिव सनीता द्वारा हस्ताक्षरित बयान में इस फैसले को पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड सोनू के नेतृत्व में उठाया गया सामूहिक कदम बताया गया है. बयान में कहा गया है, “हमारी माढ़ डिवीजनल कमेटी कॉमरेड सोनू के नेतृत्व में सशस्त्र संघर्ष छोड़ने के निर्णय का समर्थन करती है. डिवीजन की कई इकाइयाँ भी इस कदम से सहमत हैं.”
कमेटी ने यह भी याद दिलाया कि अप्रैल और मई में दिवंगत महासचिव तथा सेंट्रल रीजनल ब्यूरो प्रभारी ने सरकार से शांति वार्ता की पहल की थी, जिसे उस समय भी समर्थन मिला था. बयान में कहा गया, “सशस्त्र संघर्ष का त्याग वर्तमान परिस्थितियों की आवश्यकता है.”
माओवादियों ने यह स्वीकार किया कि बदलते राष्ट्रीय और वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप संगठन स्वयं को ढालने में विफल रहा. “हमारी सेंट्रल कमेटी आवश्यक बदलाव नहीं कर सकी, जिससे आंदोलन कमजोर हुआ, जन समर्थन घटा और हमारी कोशिशें अप्रभावी साबित हुईं. इन परिस्थितियों में हमने सशस्त्र संघर्ष छोड़ने और समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर जनता के बीच काम करने का फैसला किया है,” बयान में कहा गया.
केंद्र और राज्य सरकारों से अपील करते हुए माओवादियों ने कहा कि लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के कारण निरस्त्रीकरण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है. उन्होंने आग्रह किया कि अभियानों और गश्त को कुछ समय के लिए स्थगित किया जाए. साथ ही यह आश्वासन दिया कि इस अवधि में माढ़ (अबूझमाड़) क्षेत्र, जो छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र तक फैला है, में कोई अवैध या हिंसक गतिविधि नहीं की जाएगी.
बयान में यह भी उल्लेख है कि संगठनात्मक पुनर्गठन की प्रक्रिया 15 अक्टूबर 2025 तक पूरी कर ली जाएगी. माओवादियों का दावा है कि यह निर्णय “जनहित और जिम्मेदारी के साथ” लिया गया है.