क्या अमेरिका ईरान पर जमीनी हमला करेगा?
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुँच गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर 'भीषण बमबारी' के आदेश और उसके तुरंत बाद 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) की तैनाती ने इस सवाल को जन्म दे दिया है कि क्या अमेरिका अब ईरान पर जमीनी हमला करने की तैयारी में है?
विशेष रूप से जापान में तैनात रहने वाले 'यूएसएस त्रिपोली' और हजारों घातक मरीन कमांडोज को मध्य पूर्व की ओर मोड़े जाने के फैसले को युद्ध के अगले चरण के रूप में देखा जा रहा है.
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यद्यपि मरीन यूनिट्स का उपयोग दूतावास सुरक्षा और बचाव कार्यों के लिए होता रहा है, लेकिन उनकी मूल पहचान एक 'क्विक-रिएक्शन फोर्स' की है जो समुद्र से जमीन पर सीधे हमले करने में माहिर होती है.
ट्रंप प्रशासन का यह कदम ऐसे समय में आया है जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को बाधित कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को संकट में डाल दिया है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने यह रास्ता बंद रखा, तो उसके तेल ठिकाने अगले निशाने पर होंगे.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने यह कहते हुए अतिरिक्त बलों की मांग की थी कि युद्ध की योजना में मरीन बलों की उपलब्धता अनिवार्य है ताकि जरूरत पड़ने पर 'मैदानी विकल्पों' का इस्तेमाल किया जा सके.
हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे एक रक्षात्मक कदम बताया जा रहा है, लेकिन 'यूएसएस त्रिपोली' पर मौजूद अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और कमांडोज की मौजूदगी संकेत दे रही है कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किसी भी तरह की जमीनी कार्रवाई की संभावना को पूरी तरह से खुला रखा है.