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क्या टल जाएगा मध्य पूर्व का महासंकट?

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05 अग. 2026, 06:43 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य

नई दिल्ली । डेस्क: दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को दोबारा खोलने को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच एक अंतरिम समझौते पर सहमति बनती दिख रही है. पिछले कई हफ्तों से जारी कूटनीतिक वार्ताओं के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग में जारी गतिरोध के खत्म होने की उम्मीदें जगी हैं. इस संभावित समझौते का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच बीते 17 जून को हुए युद्धविराम को बहाल करना, जहाजों की आवाजाही से जुड़े विवादों को सुलझाना और आगे चलकर परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक चर्चा का माहौल तैयार करना है.


डोनाल्ड ट्रंप का कूटनीतिक रुख और अमेरिकी चिंताएँ


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि ईरान के साथ वार्ता सही दिशा में आगे बढ़ रही है. ट्रंप ने पहले बड़े पैमाने पर सैन्य हमले की चेतावनी दी थी, लेकिन बाद में उन्होंने अंतिम समय में कूटनीतिक रास्ते को प्राथमिकता दी. वाशिंगटन के लिए इस जलमार्ग को जल्द से जल्द खोलना बेहद आवश्यक हो गया है. 

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अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों के मद्देनज़र वैश्विक बाज़ारों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ना और घरेलू स्तर पर पेट्रोल के दाम तय सीमा से ऊपर जाना राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है. इसके अलावा, अमेरिकी सुरक्षा बलों के पास रक्षात्मक गोला-बारूद की कमी भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है, जिससे अमेरिका सीधे सैन्य टकराव के बजाय अस्थायी समझौते की ओर झुकता नज़र आ रहा है.


ओमान की मध्यस्थता और ईरान की शर्तें


ईरान सार्वजनिक तौर पर वाशिंगटन के साथ किसी भी प्रत्यक्ष बातचीत से इनकार कर रहा है. तेहरान का कहना है कि वह केवल ओमान के साथ चर्चा कर रहा है, जिसके प्रादेशिक जलक्षेत्र से होकर यह जलमार्ग गुजरता है. ओमान लंबे समय से दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाता आया है. 


ईरान की मांग है कि जलडमरूमध्य के उत्तरी गलियारे पर उसका संप्रभु नियंत्रण बना रहे और उसे जहाजों को समुद्री सेवाएं देने के एवज में सेवा शुल्क वसूलने का अधिकार मिले. यद्यपि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में टोल टैक्स नहीं लगाया जा सकता, लेकिन तटीय देश नेविगेशन और पर्यावरण सुरक्षा सेवाओं के नाम पर शुल्क वसूल सकते हैं.


समझौते का संभावित ढांचा और मुख्य चुनौतियाँ


सूत्रों के अनुसार, मध्यस्थ एक ऐसे मध्य मार्ग पर काम कर रहे हैं, जो 60 दिनों के लिए प्रभावी हो सकता है. इसके तहत फारस की खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज ईरानी जलक्षेत्र (उत्तरी लेन) का उपयोग करेंगे, जबकि खाड़ी से बाहर निकलने वाले जहाज ओमान के जलक्षेत्र (दक्षिणी लेन) से गुजरेंगे. शुरुआती 60 दिनों में कोई पारगमन शुल्क नहीं लिया जाएगा. हालाँकि, इस अस्थायी व्यवस्था के बाद जलमार्ग का स्थायी प्रशासन किसके हाथ में होगा, इसे लेकर मतभेद बरकरार हैं.


इसके अतिरिक्त, यदि ईरान को जहाजों के नियमन का अधिकार मिलता है, तो अमेरिकी प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के लिए एक नई बाधा बन सकते हैं. जब तक अमेरिकी प्रशासन कंपनियों को विशेष छूट प्रदान नहीं करता, तब तक कई जहाजी कंपनियां ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय करने से बचेंगी.


क्या खत्म होगा मध्य पूर्व का तनाव?


विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलमार्ग को फिर से खोलने का समझौता भले ही तात्कालिक राहत दे, लेकिन इससे मध्य पूर्व का पूरा संकट रातों-रात हल नहीं होगा. 


इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच जारी संघर्ष, लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमले और ईरान का परमाणु कार्यक्रम ऐसे मुद्दे हैं, जिनका समाधान होना अभी बाकी है. फिर भी, इस अंतरिम समझौते को दोनों देशों के बीच आगे की शांति वार्ता की दिशा में एक अहम और पहला कदम माना जा रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP