ईरान नागरिक ठिकानों पर हमला क्यों कर रहा है?
नई दिल्ली । डेस्क: मध्य पूर्व में जारी हालिया संघर्ष के बीच एक बड़ा सवाल यह उभर कर सामने आया है कि आखिर ईरान सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचों, जैसे हवाई अड्डों, होटलों और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना क्यों बना रहा है? इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में तेहरान ने न केवल बहरीन, कतर और यूएई में स्थित अमेरिकी सैन्य संपत्तियों पर मिसाइलें दागीं, बल्कि अपने हमलों का दायरा बढ़ाकर नागरिक क्षेत्रों तक फैला दिया है.
खाड़ी देशों की सरकारों के अनुसार, शनिवार से शुरू हुई इस जवाबी कार्रवाई में दुबई के पाम जुमेराह स्थित आलीशान होटलों, अबू धाबी और रियाद के हवाई अड्डों, और कतर व सऊदी अरब की प्रमुख तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाया गया है. ईरान की इस रणनीति के पीछे गहरे सामरिक और मनोवैज्ञानिक कारण छिपे हैं, जिनका उद्देश्य क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख देना है.
ईरान द्वारा नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने का एक मुख्य कारण उसकी अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करना है. कतर विश्वविद्यालय के ईरान विशेषज्ञ लुसियानो जकारा के अनुसार, ईरान यह दिखाना चाहता है कि वह एक साथ 10 अलग-अलग स्थानों पर सटीक हमले करने में सक्षम है. नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमला करके तेहरान यह संदेश दे रहा है कि यदि ईरान की सुरक्षा को खतरा पैदा होता है, तो इसका प्रभाव केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक होगा.
हवाई अड्डों और ऊर्जा केंद्रों को ठप्प करके ईरान ने दुनिया को यह जताने की कोशिश की है कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय यात्रा मार्गों को किसी भी समय बाधित कर सकता है. यही कारण है कि कतरएनर्जी और सऊदी अरामको जैसी दिग्गज कंपनियों को अपने परिचालन रोकने पड़े हैं, जिससे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजार में अस्थिरता का खतरा पैदा हो गया है.
ईरान के इस आक्रामक रुख का एक और बड़ा कारण 'मानव ढाल' और अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति का तर्क है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने बहरीन और यूएई में होटल परिसरों को इसलिए निशाना बनाया क्योंकि उनके पास सूचना थी कि अमेरिकी सेना ने अपने सैनिकों को सैन्य अड्डों से निकालकर इन होटलों में स्थानांतरित कर दिया है.
तेहरान का दावा है कि अमेरिका नागरिक इमारतों का उपयोग करके अपने सैनिकों को बचा रहा है, इसलिए वे उन सभी सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं जो अमेरिकी सेना की मदद कर रही हैं. इसके अलावा, ईरान यह भी मानता है कि तेल रिफाइनरियों और दूतावासों पर हमले से खाड़ी देशों पर दबाव बढ़ेगा कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशनों के लिए न करने दें.
राजनीतिक दृष्टिकोण से, ईरान का यह कदम एक दबाव तंत्र की तरह काम कर रहा है. दशकों से कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा ईरान जानता है कि उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है, लेकिन तेल की बढ़ती कीमतें उसे कुछ हद तक राहत देती हैं.
नागरिक ठिकानों पर हमला करके वह अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों को यह चेतावनी दे रहा है कि इस युद्ध की कीमत ईरान से कहीं ज्यादा उन देशों और वैश्विक उपभोक्ताओं को चुकानी होगी जो खाड़ी के तेल और व्यापारिक मार्गों पर निर्भर हैं. हवाई अड्डों के बंद होने और हजारों यात्रियों के फंसने से उत्पन्न हुई अराजकता इसी रणनीति का हिस्सा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर जल्द से जल्द युद्ध रोकने का दबाव बनाया जा सके.
कुल मिलाकर, ईरान की यह रणनीति केवल बदला लेने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश है कि वह अपनी रक्षा के लिए किसी भी 'रेड लाइन' को पार करने और क्षेत्रीय स्थिरता को दांव पर लगाने के लिए तैयार है.