ईरान के स्कूलों पर हमला क्यों-संयुक्त राष्ट्र
ईरान के स्कूलों पर हमला क्यों किया जा रहा है?
नई दिल्ली । डेस्क: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की हालिया बैठक में ईरान के शैक्षणिक संस्थानों पर हो रहे घातक हमलों ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया है. इन हमलों के पीछे मुख्य कारण अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ा गया सैन्य अभियान है. जांच में यह बात सामने आई है कि इन हमलों का मुख्य निशाना अक्सर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों के पास स्थित इमारतें होती हैं.
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की विशेष दूत फरीदा शहीद का कहना है कि मिनाब के शजरेह तैयबा गर्ल्स स्कूल जैसे संस्थानों पर सटीक हथियारों (Precision Munitions) से हमला किया गया, जो यह संकेत देता है कि यह कोई 'भूल' नहीं बल्कि जानबूझकर की गई सैन्य कार्रवाई थी.
जानकारों का मानना है कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा 'पुराने खुफिया इनपुट' (Outdated Intelligence) का इस्तेमाल करना भी इन रिहायशी और शैक्षणिक क्षेत्रों में तबाही का एक बड़ा कारण बना है.
इन हमलों में हुई तबाही के आंकड़े रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. संयुक्त राष्ट्र के शिक्षा अधिकार कार्यालय के अनुसार, अब तक अमेरिका और इज़रायल के हमलों में 600 से अधिक स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को या तो पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है या उन्हें गंभीर नुकसान पहुँचाया गया है.
इन हमलों की मानवीय कीमत भी बहुत भारी रही है, जिसमें अब तक कम से कम 230 बच्चों और शिक्षकों की मौत हो चुकी है.
अकेले मिनाब के गर्ल्स स्कूल पर हुए हमले में ही 170 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकांश मासूम बच्चे थे.
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और बच्चों की हत्या को किसी भी तर्क से सही नहीं ठहराया जा सकता.
गौरतलब है कि अतंर्राष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law - IHL) के तहत युद्ध के दौरान स्कूलों पर हमला करना पूरी तरह वर्जित है. मुख्य रूप से 1949 के जिनेवा कन्वेंशन (Geneva Conventions) और उनके 1977 के अतिरिक्त प्रोटोकॉल (Additional Protocols) के तहत स्कूलों को 'नागरिक वस्तु' (Civilian Objects) का दर्जा दिया गया है.
इन कानूनों के अनुसार, युद्धरत पक्षों को सैन्य ठिकानों और नागरिक संपत्तियों के बीच स्पष्ट अंतर करना अनिवार्य है. इसके अतिरिक्त, हेग कन्वेंशन (Hague Regulations) भी विशेष रूप से शिक्षा, कला और विज्ञान के लिए समर्पित भवनों की सुरक्षा पर जोर देता है, बशर्ते उनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए न किया जा रहा हो.
यदि कोई सेना जानबूझकर स्कूल पर हमला करती है, तो इसे 'युद्ध अपराध' (War Crime) माना जाता है, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय कानून 'सैन्य आवश्यकता' और 'मानवता' के बीच संतुलन बनाए रखने का निर्देश देता है.
साथ ही, सुरक्षित स्कूल घोषणा (Safe Schools Declaration) जैसे अंतर्राष्ट्रीय समझौते भी देशों को संघर्ष के समय स्कूलों के सैन्य उपयोग से बचने और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध करते हैं.
संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन (UNCRC) भी बच्चों के शिक्षा और सुरक्षा के अधिकार की रक्षा करता है, जिससे स्कूलों को किसी भी सैन्य हमले से मुक्त रखने की कानूनी और नैतिक बाध्यता और कड़ी हो जाती है.