शुक्र, 16 अक्टू. 2026

CGKhabar

अमेरिका में भड़की महंगाई: मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले आम जनता पर बढ़ा बोझ

C

CG Khabar

14 अक्टू. 2026, 07:44 PM 4 मिनट में पढ़ें 11

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका में मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले आई खुदरा महंगाई की रिपोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन और फेडरल रिजर्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सितंबर महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे आम जनता पर जीवन-यापन का बोझ और गहरा गया है. श्रम विभाग के ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, सालाना आधार पर महंगाई दर बढ़कर 3.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो अगस्त में 3.4 प्रतिशत दर्ज की गई थी. 


वहीं मासिक आधार पर कीमतों में 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस आंकड़े के सामने आने के बाद अब केंद्रीय बैंक द्वारा इस महीने के अंत में ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावना काफी प्रबल हो गई है.


वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट से पेट्रोल-डीजल के दाम बेकाबू


इस ताजा उछाल का सबसे मुख्य कारण ईंधन की कीमतों में आई भारी तेजी है. अमेरिका और ईरान के बीच जारी अनिश्चितता और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है. सितंबर में पेट्रोल की कीमतों में 9.1 प्रतिशत की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने अकेले ही कुल मासिक महंगाई के आधे से अधिक हिस्से में योगदान दिया. सालाना आधार पर पेट्रोल 34.2 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है. अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के मुताबिक, देश में पेट्रोल की औसत कीमत 4.33 डॉलर प्रति गैलन और डीजल 6.29 डॉलर प्रति गैलन के स्तर पर पहुंच गई है. वर्ष 2026 में अब तक 158 दिन ऐसे रहे हैं जब पेट्रोल की कीमतें 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर बनी रहीं, जो इतिहास में सबसे अधिक है.


खाने-पीने की चीजें और आवास भी हुए महंगे


पेट्रोल-डीजल के अलावा मकान के किराए और शेल्टर कॉस्ट में भी मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है, जिससे आम लोगों का घरेलू बजट गड़बड़ा गया है. हालांकि, खाद्य पदार्थों की कुल कीमतों में स्थिरता रही, लेकिन श्रेणियों के हिसाब से इसमें मिला-जुला असर देखा गया. बाहर खाना खाना 0.2 प्रतिशत महंगा हुआ है, जबकि ग्रॉसरी यानी घर के राशन की कीमतों में 0.1 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई है. ग्रॉसरी बास्केट में पोल्ट्री उत्पाद 0.7 प्रतिशत, फल व सब्जियां 0.5 प्रतिशत और जूस 1.1 प्रतिशत तक महंगे हुए हैं. हालांकि, दूध के दामों में 2.1 प्रतिशत और बीफ की कीमतों में 0.9 प्रतिशत की राहत जरूर मिली है.


एआई बूम और डेटा सेंटर्स के निवेश का असर


महंगाई के इस दौर में एक नया पहलू एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सेक्टर से भी जुड़ा है. डेटा सेंटर्स, एआई फर्मों और मॉडल्स में हो रहे अरबों डॉलर के भारी-भरकम निवेश के चलते कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और एक्सेसरीज के दामों में जबरदस्त उछाल आया है. पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इनके दाम 28 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं.


बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि टेक सेक्टर में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चल रही होड़ भी लागत और महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है.


फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव


महंगाई के इन आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व पर फिर से मौद्रिक नीति सख्त करने का दबाव बना दिया है. पिछले महीने ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने तीन साल में पहली बार दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर उन्हें 3.75 से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंचा दिया था. विशेषज्ञों के बीच अब इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि फेड इस बार दरें स्थिर रखेगा या फिर से बढ़ाएगा.


वित्तीय बाजारों के अनुमानों के मुताबिक, दरों में एक बार फिर 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की लगभग 47 प्रतिशत संभावना जताई जा रही है.


मिडटर्म चुनाव और शेयर बाजार पर असर


3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले आई इस रिपोर्ट ने राजनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया है. महंगाई के इस आंकड़े ने रिपब्लिकन पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि हालिया सर्वेक्षणों में लगभग 78 प्रतिशत अमेरिकियों ने बढ़ती कीमतों के लिए राष्ट्रपति की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है.


वहीं दूसरी ओर, महंगाई रिपोर्ट आते ही अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जहां नैस्डैक में 0.8 प्रतिशत और एसएंडपी 500 में 0.6 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP