SC ने शृंगेरी सीट के 2023 के मतगणना वीडियो गायब होने पर जताई नाराजगी
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक की शृंगेरी विधानसभा सीट पर वर्ष 2023 में हुई मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने में विफलता पर भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को कड़ा रुख अपनाते हुए कड़ी फटकार लगाई है. शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग के उस बयान पर गहरा आश्चर्य जताया जिसमें उसने कहा था कि 2023 की मतगणना का वीडियो ट्रैस नहीं हो पा रहा है. अदालत ने आयोग को चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक संबंधित रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए, तो उसके खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की जाएगी.
यह मामला शृंगेरी विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस नेता टी.डी. राजेगौड़ा और भाजपा उम्मीदवार डी.एन. जीवराज के बीच जारी चुनावी विवाद से जुड़ा है. साल 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेगौड़ा ने महज 201 वोटों के बेहद करीबी अंतर से जीत दर्ज की थी. इसके बाद जीवराज ने इस परिणाम को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी.
इस साल 6 अप्रैल को उच्च न्यायालय ने अमान्य घोषित किए गए 279 पोस्टर बैलेटों की पुनः जांच और गिनती का आदेश दिया था. हालांकि, 3 मई 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा घोषित नए नतीजों में राजेगौड़ा के वोट 255 कम हो गए और जीवराज को विजयी घोषित कर दिया गया.
कांग्रेस उम्मीदवार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. राजेगौड़ा का तर्क है कि उच्च न्यायालय ने केवल 279 खारिज किए गए डाक मतपत्रों की जांच का आदेश दिया था, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने अवैध रूप से उनके पक्ष में पड़े 562 वैध डाक मतपत्रों पर फिर से विचार किया. मई में सुप्रीम कोर्ट ने राजेगौड़ा को अंतरिम राहत देते हुए आदेश दिया था कि याचिका के लंबित रहने तक वे विधायक बने रहेंगे.
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव आयोग का प्राथमिक काम ही पारदर्शी चुनाव कराना और उसके दस्तावेज सुरक्षित रखना है. आयोग यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकता कि रिकॉर्ड ढूंढे जा रहे हैं. अदालत ने कहा कि आयोग ऐसे लचर बहाने बनाना बंद करे और उपलब्ध रिकॉर्डों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे.
कांग्रेस नेता मूल मतगणना और हाल ही में हुई दोबारा गिनती के पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) की रिपोर्ट तथा वीडियो रिकॉर्डिंग देखना चाहते हैं.
जब चुनाव आयोग के वरिष्ठ वकील ने 2023 का वीडियो न मिलने की बात कही, तो पीठ ने स्पष्ट कर दिया कि इस प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है. इस मामले में अगली सुनवाई 15 फरवरी 2027 को तय की गई है. उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता जीवराज पर पोस्टर बैलेट से छेड़छाड़ का आपराधिक मामला भी लंबित है, जिस पर मई में उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी.