गाइडलाइन दर कहां सुधरी? यह संशोधन सतही है- भूपेश बघेल
रायपुर । संवाददाता: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ सरकार के भूमि गाइडलाइन दरों के संशोधन को 'सतही' बताते हुए कटाक्ष किया है. उन्होंने एक्स पर लिखा, "गाइडलाइन दर कहां सुधरी? यह संशोधन सतही है और जनता को कम राहत देता है. दरें अनुचित रूप से बढ़ाई गई हैं, बिना सुधार के कुछ हासिल नहीं होगा. सरकार को आगे और संशोधन करने पड़ेंगे, और यह मजबूरी में होगा. संपत्ति कर का बोझ भी बना रहेगा." कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को जनता के दबाव में झुकना पड़ेगा.
यह बयान सोमवार 8 दिसंबर 2025 को जारी हुए सरकारी आदेश के बाद आया है, जिसमें 19 नवंबर के विवादास्पद आदेश में कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया. उस आदेश में शहरी क्षेत्रों में 20% और ग्रामीण इलाकों में 50 से 300% तक गाइडलाइन दरों में वृद्धि की गई थी, जिससे रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी में भारी उछाल का डर पैदा हो गया.
भूमि मालिकों, रियल एस्टेट कारोबारियों और विपक्ष के अलावा सत्तारूढ़ भाजपा के ही रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी इसका विरोध किया था. अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर 100 से 900% तक की 'अनियोजित' वृद्धि को किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए हानिकारक बताया.
उन्होंने 2 दिसंबर को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर राज्य में बिना जनसंपर्क, बिना वास्तविक आकलन और बिना सामाजिक-आर्थिक प्रभाव की समीक्षा के कलेक्टर गाइडलाइन दरों में 100% से 800-900% तक की 'अभूतपूर्व और अनियोजित' वृद्धि का जिक्र किया. अग्रवाल ने पत्र में बताया कि उन्हें हजारों किसानों और छोटे व्यापारियों से नकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जो इस फैसले से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं.
सरकार ने दावा किया था कि यह वृद्धि 'वैज्ञानिक और पारदर्शी' तरीके से की गई है, जो 2017-18 के बाद पहली बार हुई. इसका उद्देश्य किसानों को भूमि अधिग्रहण में तीन गुना मुआवजा, बैंक लोन में आसानी और बाजार मूल्य की स्पष्टता सुनिश्चित करना था.
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने इसे 'किसान हितैषी' बताया. हालांकि, मुख्यमंत्री ने सोमवार 8 दिसंबर को पत्रकारों से कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है और जनहित में निर्णयों में संशोधन करना अच्छी सरकार की निशानी है. उन्होंने गाइडलाइन दरों पर चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि संबंधित पक्षों से चर्चा चल रही है और जरूरत पड़ी तो संशोधन किए जाएंगे.
सोमवार की प्रेस रिलीज में कहा गया कि सेंट्रल वैल्यूएशन बोर्ड ने जिला समितियों को आपत्तियों की समीक्षा का निर्देश दिया है. 31 दिसंबर तक प्रस्ताव जमा करने होंगे, जिनकी जांच के बाद अंतिम दरें तय होंगी.
आदेश में शहरी क्षेत्रों में 1400 वर्गमीटर तक के प्लॉटों के मूल्यांकन की 'इनक्रिमेंटल विधि' समाप्त कर दी गई और बहुमंजिला भवनों में फ्लैट, दुकान व कार्यालयों के सुपर बिल्ट-अप एरिया आधारित मूल्यांकन की व्यवस्था हटा दी गई. सरकार का कहना है कि इससे जनता को राहत मिलेगी, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपर्याप्त बताते हुए विरोध जारी रखने का ऐलान किया है.