छत्तीसगढ़ में VIP सुरक्षा: 40 नेताओं का सुरक्षा घेरा समाप्त, 50 से अधिक की श्रेणी घटी
छत्तीसगढ़ सरकार ने वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए 40 नेताओं की सुरक्षा वापस लेने और 50 से अधिक नेताओं का सुरक्षा घेरा कम करने का फैसला किया है.
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ा निर्णय लिया है. इसके तहत 40 नेताओं की सुरक्षा पूरी तरह से हटा दी गई है, जबकि 50 से अधिक जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा श्रेणी में कटौती की गई है.
इस बदलाव के बाद लगभग 200 पुलिस जवान वापस अपने मूल बल में लौट सकेंगे. इस फैसले के बाद अब प्रदेश में केवल मुख्यमंत्री और राज्यपाल के पास ही जेड प्लस सुरक्षा रहेगी, जबकि केदार कश्यप, महेश गागड़ा, दीपक बैज और महेंद्र कर्मा के परिजनों जैसे नेताओं की सुरक्षा को घटाकर जेड श्रेणी कर दिया गया है.
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, बस्तर में कभी नक्सलियों का प्रभाव हुआ करता था, लेकिन अब वहां से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और वह क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है. इसी बदलते वातावरण के कारण नेताओं की सुरक्षा की चरणबद्ध समीक्षा की जा रही है और प्रशासन विकास कार्यों में जुटा हुआ है.
हालांकि, चीफ इंटेलीजेंस विंग के अमित कुमार ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी नेता को आवश्यकता या खतरा होता है तो स्थानीय स्तर पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी और संवेदनशील इलाकों में जाने पर भी सुरक्षा दी जाएगी.
उल्लेखनीय है कि नक्सलवाद खत्म होने के बावजूद 400 नेताओं की सुरक्षा में 1550 जवान तैनात थे, जिससे जम्मू-कश्मीर के बाद छत्तीसगढ़ देश में नेताओं की सुरक्षा में सबसे ज्यादा पुलिस बल लगाने वाला दूसरा राज्य बन गया था. दैनिक भास्कर द्वारा 29 अक्टूबर को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लेते हुए यह कदम उठाया है.
इस निर्णय के तहत मुख्य रूप से बस्तर के सरपंचों, मंडल अध्यक्षों और मृत नेताओं के परिजनों की सुरक्षा हटाई गई है, जो ज्यादातर एक्स श्रेणी में थे. वहीं कांकेर विधायक जैसी हस्तियों की सुरक्षा जेड से घटाकर वाई प्लस कर दी गई है, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सांसद महेश कश्यप की सुरक्षा को यथावत रखा गया है.
भारत में वीआईपी हस्तियों और नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था खुफिया एजेंसियों द्वारा खतरे के आंकलन के आधार पर तय की जाती है. देश में मुख्य रूप से 6 प्रकार की सुरक्षा श्रेणियां दी जाती हैं, जो इस प्रकार हैं:
1- SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप): यह देश का सबसे उच्च स्तरीय सुरक्षा घेरा है, जो केवल भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री को दिया जाता है. इसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित एलीट कमांडो तैनात रहते हैं. इनके पास आधुनिक बुलेटप्रूफ गाड़ियां, ऑटोमैटिक हथियार, पायलट वाहन, और 24 घंटे सुरक्षा का व्यापक ढांचा होता है.
2- Z+ (जेड प्लस) श्रेणी: यह देश की दूसरी सबसे मजबूत सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. इसमें 10 से अधिक NSG या ITBP/CRPF के विशेष कमांडो शामिल होते हैं. सुविधाओं में 24 घंटे की एस्कॉर्ट टीम, कम से कम एक बुलेटप्रूफ गाड़ी, और आगे-पीछे सुरक्षा काफिला शामिल होता है.
3- Z (जेड) श्रेणी: इस सुरक्षा चक्र में 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं. इसमें 4 से 6 सशस्त्र कमांडो के अलावा पुलिस जवान और पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) शामिल होते हैं. इसके साथ सुरक्षा काफिले में एस्कॉर्ट वाहन और आवश्यकतानुसार बुलेटप्रूफ गाड़ी की सुविधा प्रदान की जाती है.
4- Y+ (वाई प्लस) श्रेणी: इसमें कुल 11 सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा घेरा होता है. इसमें 2 से 4 विशेष कमांडो और 2 से 3 पीएसओ शिफ्ट के आधार पर चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं. इसके तहत यात्रा के समय सुरक्षा वाहन की सुविधा भी मिलती है.
5- Y (वाई) श्रेणी: इस श्रेणी में 8 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं, जिनमें 1 से 2 कमांडो और 2 व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) तैनात किए जाते हैं. इसमें मुख्य रूप से आवास और व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी की सुविधा मिलती है.
6- X (एक्स) श्रेणी: यह बुनियादी सुरक्षा स्तर है. इसमें कोई कमांडो नहीं होता, बल्कि 2 से 5 सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं. इनमें मुख्य रूप से 1 या 2 पीएसओ (PSO) शामिल होते हैं जो रोटेशन में 24 घंटे व्यक्तिगत सुरक्षा संभालते हैं.
भारत में केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा सुरक्षा प्रदान करने की मूल श्रेणियां (X, Y, Y+, Z, Z+) एक समान ही होती हैं, लेकिन राज्य सरकारों द्वारा सुरक्षा देने के मानक और प्रक्रिया में कुछ विशिष्ट अंतर होते हैं:
1- सुरक्षा का मानक और खतरे का आकलन: राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा का प्राथमिक मानक 'थ्रेट परसेप्शन' यानी व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर कितना खतरा है, उस पर आधारित होता है. राज्य में खुफिया एजेंसियां (जैसे स्टेट इंटेलिजेंस विंग/CID) यह आकलन करती हैं कि किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा को कितना जोखिम है.
2- स्थानीय पुलिस बल की तैनाती: केंद्रीय सुरक्षा कवर (जैसे CRPF, ITBP या CISF) के विपरीत राज्य सरकार की सुरक्षा में मुख्य रूप से राज्य पुलिस बल और उनके विशेष बलों के जवानों व पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) को ही तैनात किया जाता है.
3- समीक्षा समिति (State Security Committee): राज्य स्तर पर गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और खुफिया विभाग के प्रमुखों की एक समिति होती है, जो समय-समय पर वीआईपी सुरक्षा समीक्षा बैठक करती है. यदि किसी इलाके में खतरा कम हो जाता है (जैसे नक्सली या आपराधिक प्रभाव में कमी आना), तो सुरक्षा घटा दी जाती है या पूरी तरह हटा ली जाती है. वहीं आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा बढ़ाई भी जा सकती है.
4- अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction): राज्य सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा मुख्य रूप से उसी राज्य की सीमा के भीतर मान्य होती है. यदि वीआईपी किसी अन्य राज्य में जाता है, तो संबंधित राज्य की पुलिस से अतिरिक्त समन्वय की आवश्यकता होती है.
5- स्थानीय पद एवं आवश्यकता आधारित सुरक्षा: राज्य सरकार केवल मंत्रियों या विधायकों को ही नहीं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों के स्थानीय नेताओं, सरपंचों, पंचायत प्रतिनिधियों और गवाहों को भी स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षा प्रदान करती है.