US जनादेश 2026: डेमोक्रेट्स ने छीना अमेरिकी संसद का नियंत्रण (Developing Story)
मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत के बाद अमेरिकी संसद के दोनों सदनों का नियंत्रण बदल गया है. ट्रंप के कार्यकाल के बाकी दो सालों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है.
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CG Khabar
04 नव. 2026, 11:10 AM
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डोनाल्ड ट्रंप
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका में संपन्न हुए मध्यावधि चुनावों के परिणामों ने देश के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलकर रख दिया है. डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिपब्लिकन पार्टी से प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) और सीनेट दोनों का नियंत्रण अपने नाम कर लिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व से जनता में उपजी असंतुष्टि और युद्ध से उत्पन्न आर्थिक दुष्प्रभावों को भुनाते हुए डेमोक्रेट्स ने यह बड़ी सफलता दर्ज की है.
Election Liveसंसद के दोनों सदनों पर विपक्ष का कब्जा होने के बाद अब ट्रंप प्रशासन के लिए विधायी प्रस्तावों को पारित कराना कठिन हो जाएगा और प्रशासन को कड़ी संसदीय निगरानी का सामना करना पड़ेगा. यद्यपि विदेश नीति के क्षेत्र में राष्ट्रपति के पास अधिकार बने रहेंगे, लेकिन उनके आंतरिक व विधायी एजेंडे को भारी प्रतिरोध का सामना करना तय माना जा रहा है.
हकीम जेफ्रीस का ऐतिहासिक संदेश और 'अमेरिका बिकाऊ नहीं है' का ऐलान
प्रतिनिधि सभा में अल्पसंख्यक नेता हकीम जेफ्रीस ने इस चुनाव परिणाम को बदलाव का स्पष्ट संदेश करार दिया. समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मतदाताओं ने अतिवाद और भ्रष्टाचार को नकारते हुए एक ऐसी संसद बनाने का जनादेश दिया है जो अमेरिकी जनता के हितों को सर्वोपरि रखेगी. जेफ्रीस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि धनबल से चुनाव खरीदने की कोशिशें नाकाम रही हैं और अमेरिका बिकाऊ नहीं है. जनवरी में नई कांग्रेस का सत्र शुरू होने पर जेफ्रीस प्रतिनिधि सभा के पहले अश्वेत स्पीकर बनने की राह पर हैं. उन्होंने घोषणा की कि डेमोक्रेटिक बहुमत की प्राथमिकता आम परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करना और वाशिंगटन में जवाबदेही बहाल करना होगी.
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अरबों के दान के बाद भी एलन मस्क का अभियान विफल, ट्रंप ने खुद को बताया 'राजनैतिक विश्लेषक'
रिपब्लिकन पार्टी के सबसे बड़े वित्तीय समर्थक एलन मस्क ने इस चुनावी चक्र में लगभग 450 से 474 मिलियन अमेरिकी डॉलर रिपब्लिकन समर्थक सुपर पीएसी को दिए थे. हालांकि, उनका यह भारी-भरकम खर्च पार्टी को पराजय से नहीं बचा सका. डेमोक्रेट्स ने टेक्सास, ओहायो, साउथ कैरोलिना और नॉर्थ कैरोलिना जैसे राज्यों में सीनेट सीटों पर कब्जा जमाया या बढ़त बनाई. चुनाव नतीजों के रुझान आने के बीच मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मौन दिखाई दिए.
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अब एक 'पॉलिटिकल पंडित' (राजनीतिक विश्लेषक) की भूमिका निभाएंगे और यह विश्लेषण करेंगे कि उम्मीदवार क्यों जीते या हारे. इससे पहले की एक पोस्ट में उन्होंने दावा किया था कि यदि वह स्वयं बैलेट पेपर पर होते तो रिपब्लिकन पार्टी की प्रचंड जीत हुई होती.
'वीटो' कैप के जरिए कड़े तेवर और सहयोग का मिलाजुला संदेश
चुनावी नतीजों के स्पष्ट होने के साथ ही ट्रंप का रुख मिश्रित नजर आया. एक ओर उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए साक्षात्कार में कहा कि वह मध्यावधि नतीजों को स्वीकार करने और डेमोक्रेट्स के साथ काम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने ट्रूथ सोशल पर 'VETO' लिखे लाल रंग के कैप की तस्वीर साझा कर यह संकेत भी दे दिया कि संसद से पारित होने वाले विपक्षी विधेयकों पर वह अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकिचाएंगे.
शांतिपूर्ण मतदान और एंटी-कम्युनिज्म प्रोक्लेमेशन
सुरक्षा चिंताओं और राजनीतिक हिंसा की आशंकाओं के विपरीत पूरे देश में मतदान काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा और किसी बड़ी गड़बड़ी या हिंसा की सूचना नहीं मिली. चुनाव की रात ही व्हाइट हाउस ने 'एंटी-कम्युनिज्म वीक 2026' की घोषणा जारी की, जिसमें साम्यवादी और समाजवादी विचारधाराओं को मानवीय स्वतंत्रता के लिए खतरा बताया गया. विश्लेषक इसे राष्ट्रपति द्वारा अपने मुख्य मतदाता वर्ग को एकजुट रखने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं.