ऑपरेशन मिडटर्म्स हैमर: ईरान युद्ध का असर अब वाशिंगटन की चुनावी चौखट पर
ईरान में जारी सैन्य टकराव अब अमेरिका की घरेलू राजनीति और आगामी मिडटर्म चुनावों को प्रभावित कर रहा है. आर्थिक दबाव, बढ़ती महंगाई और गिरती अप्रूवल रेटिंग के बीच अमेरिकी मतदाता अपने वोट के जरिए बड़ा संदेश देने की तैयारी में हैं.
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के तेहरान टाइम्स की 3 नवंबर की खबर के अनुसार वाशिंगटन ने कभी यह अनुमान लगाया था कि ईरान के खिलाफ उसका युद्ध अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता का एक त्वरित और निर्णायक प्रदर्शन साबित होगा. हालांकि, कई महीनों के बाद भी यह संघर्ष भारी आर्थिक और राजनीतिक कीमत वसूल रहा है. व्हाइट हाउस को अब इस सच्चाई का अहसास हो रहा है कि युद्ध हमेशा तब खत्म नहीं होते जब उनके रणनीतिकार जीत की घोषणा कर देते हैं. कभी-कभी ये संघर्ष वापस घर लौट आते हैं और इस बार इनका प्रभाव सीधे बैलेट बॉक्स यानी मतदान केंद्रों पर देखने को मिल सकता है.
जून 2025 में ईरानी परमाणु सुविधाओं के खिलाफ शुरू किए गए अमेरिकी सैन्य अभियान 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' की तर्ज पर अब इसे 'ऑपरेशन मिडटर्म्स हैमर' का नाम दिया जा रहा है. ट्रम्प प्रशासन द्वारा उस समय इस कार्रवाई को ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर एक निर्णायक प्रहार के रूप में पेश किया गया था. लेकिन इसके बाद शुरू हुआ व्यापक टकराव अब एक जटिल रूप ले चुका है, जिसके नतीजे अब कांग्रेस पर नियंत्रण बनाए रखने के रिपब्लिकन पार्टी के अभियान को प्रभावित कर रहे हैं.
अमेरिका फर्स्ट के वादे और लंबे खिंचते संघर्ष का विरोधाभास
इस पूरे परिदृश्य में एक गहरा विरोधाभास साफ दिखाई देता है. जो राष्ट्रपति 'अमेरिका फर्स्ट' का वादा करके और महंगे विदेशी मामलों से दूर रहने का संकल्प लेकर व्हाइट हाउस में लौटे थे, वे ही ईरान के साथ एक व्यापक युद्ध का नेतृत्व कर रहे हैं. यह एक ऐसा संघर्ष बन चुका है जो प्रशासन द्वारा दिए गए शुरुआती अनुमानों से कहीं आगे खींच गया है. जिस सैन्य कार्रवाई को अत्यधिक बल प्रदर्शन माना जा रहा था, वह अब एक दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक चुनौती में बदल चुकी है और इसका बोझ अमेरिकी मतदाताओं को उठाना पड़ रहा है.
राजनीतिक चेतावनी के संकेत पिछले कई महीनों से लगातार मिल रहे हैं. सितंबर के रॉयटर्स/इप्सोस पोल के अनुसार केवल 34 प्रतिशत अमेरिकियों ने ईरान पर अमेरिकी हमलों का समर्थन किया था, जबकि 82 प्रतिशत का मानना था कि यह संघर्ष एक लंबे समय तक जारी रहने की संभावना है. इसी पोल में जेनेरिक कांग्रेस बैलेट पर पंजीकृत मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स रिपब्लिकन से आठ अंक आगे चल रहे थे.
गिरती अप्रूवल रेटिंग और मतदाताओं का बदलता रुख
ताजा आंकड़े भी व्हाइट हाउस के लिए बहुत राहत देने वाले नहीं हैं. 2 नवंबर को पूरे हुए रॉयटर्स/इप्सोस पोल में राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग 32 प्रतिशत दर्ज की गई, जो उनके राजनीतिक करियर के सबसे निचले स्तर के करीब है. जेनेरिक कांग्रेस बैलेट पर डेमोक्रेट्स 46 प्रतिशत के साथ रिपब्लिकन के 38 प्रतिशत से आगे थे. इसके अलावा, आधे निर्दलीय मतदाताओं ने कहा कि उनका वोट ट्रम्प का विरोध करने के उद्देश्य से था, जबकि केवल 13 प्रतिशत ने समर्थन में वोट देने की बात कही.
इन सब के बीच अर्थव्यवस्था मतदाताओं के लिए सबसे मुख्य चिंता बनी हुई है. पोल में 78 प्रतिशत लोगों ने जीवन यापन की लागत को अपना वोट तय करने का बेहद महत्वपूर्ण या शीर्ष मुद्दा माना. यहीं पर ईरान युद्ध प्रशासन के लिए विशेष रूप से नुकसानदेह साबित हो रहा है, क्योंकि जो मतदाता युद्ध के मैदान की गतिविधियों पर नजर नहीं भी रखते, वे भी ऊर्जा बाजारों में आए व्यवधान और घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव के रूप में इसके परिणामों को महसूस कर रहे हैं.
जीवन यापन की लागत और युद्ध का आर्थिक प्रभाव
शिकागो काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स के 2026 के सर्वेक्षण में पाया गया कि 86 प्रतिशत अमेरिकियों का मानना था कि ईरान के साथ युद्ध अमेरिका में जीवन यापन की लागत के लिए बुरा साबित हुआ है. व्यापक रूप से 68 प्रतिशत लोगों का कहना था कि यह युद्ध लड़ने योग्य नहीं था, जबकि केवल 31 प्रतिशत ने इसे सार्थक माना. निर्दलीय मतदाताओं में युद्ध के प्रति विरोध विशेष रूप से अधिक देखा गया, जहां 76 प्रतिशत लोगों ने कहा कि इसके नुकसान इसके फायदों से अधिक हैं.
चुनाव शायद ही कभी केवल विदेश नीति के आधार पर तय होते हैं. वे राशन के सामान की कीमत, कार में ईंधन भरने की लागत, रोजगार की सुरक्षा और इस सामान्य अहसास से तय होते हैं कि सरकार लोगों के जीवन को बेहतर बना रही है या बदतर. ऐसे में जो युद्ध इन लागतों को बढ़ाता है, वह उन मतदाताओं के लिए भी एक घरेलू राजनीतिक समस्या बन जाता है जो दूर-दराज के सैन्य अभियानों में कोई खास दिलचस्पी नहीं रखते.
आगामी चुनावों को लेकर प्रशासन की रणनीतिक चिंताएं
प्रशासन के अपने राजनीतिक आकलन भी इस स्थिति को दर्शाते हैं. सितंबर में एक रिपोर्ट में सामने आया था कि ट्रम्प के वरिष्ठ सहयोगी मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान संघर्ष को और बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे थे, क्योंकि उन्हें डर था कि नया सैन्य टकराव रिपब्लिकन पार्टी के चुनावी नुकसान को और गहरा कर सकता है. व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के अनुसार इस समय नवंबर की चुनावी प्राथमिकता सबसे ऊपर है.
यदि यह युद्ध एक पूर्ण सफलता होता, तो व्हाइट हाउस चुनाव अभियान के दौरान इसकी दृश्यता को लेकर इतना चिंतित नहीं होता. ट्रम्प के लिए समस्या सिर्फ यह नहीं है कि युद्ध उम्मीद से अधिक समय तक चला है, बल्कि यह है कि प्रशासन सैन्य कार्रवाई को एक स्पष्ट राजनीतिक परिणाम में बदलने में संघर्ष कर रहा है. घोषित उद्देश्य बदलते रहे हैं, समय सीमा बार-बार बदली है, और त्वरित समाधान का वादा एक ऐसे संघर्ष में बदल गया है जिसके परिणामों को संभालना कठिन हो रहा है.
रिपब्लिकन के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह मिडटर्म चुनाव ट्रम्प के दावों और उनकी सरकार की वास्तविकताओं के बीच का एक जनमत संग्रह बन जाए. यद्यपि राष्ट्रपति स्वयं बैलेट पर नहीं हैं, लेकिन उनकी नीतियां और फैसले चुनावी मैदान में हैं. ऐसे में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर का संदेश भले ही तेहरान के लिए रहा हो, लेकिन ऑपरेशन मिडटर्म्स हैमर का संदेश वाशिंगटन के लिए हो सकता है कि सैन्य ताकत विदेश में लक्ष्यों को नष्ट कर सकती है, लेकिन वह किसी सरकार को उसके फैसलों के राजनीतिक परिणामों से नहीं बचा सकती.