वाशिंगटन की सियासत में 'लाल लहर': डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर जड़ें जमा रहा है DSA
कभी अमेरिकी राजनीति के हाशिए पर रहने वाला संगठन 'डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका' (DSA) अब डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्य ढांचे में अपनी मजबूत पैठ बना रहा है. जोहरान ममदानी की न्यूयॉर्क के मेयर चुनाव में जीत और 2026 के प्राइमरी नतीजों के बाद यह स्पष्ट है कि अमेरिका में वामपंथी और सामाजिक-आर्थिक मुद्दों की गूंज तेजी से बढ़ रही है.
नई दिल्ली । डेस्क: हांगकांग के अखबार साऊथ चाइना पोस्ट की खबर है कि वर्षों तक अमेरिकी राजनीति में 'डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका' (DSA) का प्रभाव नाममात्र का रहा. हालांकि, अब स्थिति में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. साल 2024 के बाद से इस संगठन के सदस्यों की संख्या दोगुनी से अधिक बढ़कर लगभग 1,20,000 तक पहुंच गई है. वहीं दूसरी ओर, संसद में DSA समर्थित सदस्यों की संख्या 2 से बढ़कर 7 तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
इस राजनीतिक बदलाव में सबसे बड़ा मोड़ न्यूयॉर्क से आया, जहां 2025 के मेयर चुनाव में जोहरान ममदानी की जीत ने आंदोलन को बड़ी चुनावी सफलता दिलाई. ममदानी ने आवास की वहनीयता, सार्वजनिक परिवहन और दैनिक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को मुद्दा बनाकर पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो को हराया. उनकी इस जीत ने साबित कर दिया कि संगठन का आर्थिक संदेश पारंपरिक राजनीतिक आधार से परे भी असरदार है.
सिटी हॉल से कैपिटल हिल तक का सफर
DSA कोई तीसरा अलग दल नहीं है, बल्कि यह डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर रहकर काम करने वाला एक वामपंथी संगठन है, जो प्राइमरी चुनावों में अपने उम्मीदवारों का समर्थन करता है. 1982 में लेखक और कार्यकर्ता माइकल हैरिंगटन के नेतृत्व में गठित इस संगठन ने अमेरिकी वामपंथ की दो धाराओं—एक पुरानी सोशल-डेमोक्रेटिक मूवमेंट और 1960 के दशक के न्यू लेफ्ट कार्यकर्ताओं—को एक साथ जोड़ा.
रीगन काल के दौरान स्थापित इस समूह का मुख्य विचार डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर रहकर प्रभाव बढ़ाना था. संगठन का मंच प्रमुख उद्योगों पर मजबूत सार्वजनिक नियंत्रण, धन पर उच्च कर, 'मेडिकेयर फॉर ऑल' प्रणाली और कम आक्रामक अमेरिकी विदेश नीति की वकालत करता है. बर्नी सैंडर्स के 2016 व 2020 के राष्ट्रपति अभियानों और 2018 में अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ की जीत ने इस विचार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई.
2026 के प्राइमरी चुनावों में बढ़ता दबदबा
मेयर चुनाव की इस गति का असर 2026 के डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनावों में भी साफ दिखाई दे रहा है. न्यूयॉर्क में ममदानी समर्थित उम्मीदवारों दारियालिजा एविला शेवेलियर और क्लेयर वाल्देज़ जैसी महिला नेताओं ने स्थापित चेहरों को चुनौती दी है. इसके अलावा पेनसिल्वेनिया में क्रिस रैब, कोलोराडो में मेलाट कीरोस और मिशिगन में डोनावन मैककिनी जैसे उम्मीदवार प्रतिनिधि सभा में सोशलिस्ट गुट को विस्तार देने की रेस में हैं.
प्रगतिशील आंदोलन का यह दायरा DSA के बाहर भी फैला है. मिशिगन में पूर्व जन स्वास्थ्य अधिकारी अब्दुल अल-सयद ने डेमोक्रेटिक सीनेट प्राइमरी में जीत दर्ज की. हालांकि अल-सयद खुद को समाजवादी न मानकर नियंत्रित पूंजीवाद का समर्थक बताते हैं, लेकिन उन्हें सैंडर्स और ओकासियो-कोर्टेज़ का समर्थन हासिल है. इंटरनेट पर भी ट्विच स्ट्रिमर हसन पाइकर्स जैसे प्रभावशालियों के ज़रिए युवाओं के बीच इस विचारधारा की पहुंच बढ़ी है.
डेमोक्रेटिक नेतृत्व के लिए नई चुनौतियाँ
DSA की इन सफलताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं. हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीस ने स्पष्ट किया है कि वे DSA के आधिकारिक एजेंडे का समर्थन नहीं करते. पार्टी रणनीतिकारों को डर है कि एक बड़ा सोशलिस्ट गुट पार्टी की एकजुटता और 2028 के आगामी चुनावों में प्रतिस्पर्धी जिलों को जीतने की रणनीति को जटिल बना सकता है.
हालांकि, अधिकांश DSA उम्मीदवार सुरक्षित डेमोक्रेटिक सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे तत्काल चुनावी जोखिम भले कम हो, लेकिन नीतिगत प्राथमिकताओं पर उनका प्रभाव बढ़ना तय है.
चीन नीति पर बदल सकता है वैश्विक दृष्टिकोण
विदेश नीति के मामले में DSA हमेशा से कम टकराव वाले दृष्टिकोण का समर्थक रहा है. संगठन सैन्य विस्तार, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और चीन पर कड़े प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों का विरोध करता रहा है. संसद में DSA समर्थित सदस्यों की बढ़ती संख्या भले ही वाशिंगटन की चीन नीति को रातों-रात न बदले, लेकिन यह द्विपक्षीय सहमति को प्रभावित कर सकती है.
मेट्रो डीसी DSA चैप्टर के अध्यक्ष कर्टिस हेगन्स के अनुसार, जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों पर चीन के साथ सहयोग आवश्यक है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का चीन पर कोई एक आधिकारिक रुख नहीं है. फिर भी, क्लेयर वाल्देज़ जैसी नई उम्मीदवार तनाव कम करने और जलवायु कूटनीति को फिर से शुरू करने की बात कह रही हैं, जो आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति के रुख पर असर डाल सकता है.