हमारे खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध पर उतरे अमेरिका-इजरायल: खामेनेई
तेहरान । डेस्क: ईरान के तेहरान टाइम्स के हवाले से खबर है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई ने देश को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने चेतावनी दी है कि इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका सैन्य मोर्चे पर नाकाम रहने के बाद अब ईरान के खिलाफ मनोवैज्ञानिक और हाइब्रिड (मिश्रित) युद्ध को तेज कर रहे हैं.
इस्लामी गणतंत्र के संस्थापक इमाम खुमैनी की 37वीं पुण्यतिथि के अवसर पर जारी एक विशेष संदेश में सर्वोच्च नेता ने देशवासियों से बाहरी दबावों के सामने राष्ट्रीय एकता, एकजुटता और लचीलापन बनाए रखने का पुरजोर आह्वान किया.
अपने संदेश में अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट किया कि युद्ध के मैदान में मिली शिकस्त के बाद ईरान के दुश्मन अब जनता के भरोसे को तोड़ने, देश की निर्णय लेने की प्रक्रियाओं को प्रभावित करने और समाज में दरार पैदा करने की कोशिशों में जुट गए हैं.
उन्होंने हालिया सैन्य विफलताओं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते अलगाव का जिक्र करते हुए कहा कि इजरायली शासन और उसके समर्थक अब गैर-सैन्य रणनीतियों पर निर्भर हो रहे हैं ताकि ईरानी राष्ट्र को भीतर से कमजोर किया जा सके.
उनके अनुसार, इस नए अभियान के तहत देश में डर, संदेह, निराशा, अविश्वास और सामाजिक ध्रुवीकरण फैलाने की साजिश रची जा रही है, जिसे केवल राष्ट्रीय सतर्कता और आपसी विश्वास से ही नाकाम किया जा सकता है.
अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने सरकारी अधिकारियों को विशेष रूप से सचेत करते हुए कहा कि वे जनता में आशा और आत्मविश्वास की भावना को मजबूत करें और ऐसे किसी भी बयान या कदम से बचें जिससे समाज में असंतोष या निराशा फैले.
उन्होंने जोर देकर कहा कि दुश्मन देश के अधिकारियों में गलतफहमी पैदा करना चाहता है, जिसे सामूहिक समझदारी से रोकना होगा. तेहरान में इमाम खुमैनी के मजार पर आयोजित इस स्मरणोत्सव में लाखों लोगों ने हिस्सा लिया, जिसे सर्वोच्च नेता ने दिवंगत क्रांतिकारी नेता के आत्म-विश्वास और दमन के खिलाफ प्रतिरोध के सिद्धांतों को याद करने का अवसर बताया.
इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने 1963 के विद्रोह और 1979 की इस्लामी क्रांति का उदाहरण दिया, जो ईरान की स्वतंत्रता और मजबूत पहचान के स्तंभ रहे हैं.
संदेश के समापन पर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने देश के युवाओं, बुद्धिजीवियों और सांस्कृतिक हस्तियों से अपील की कि वे इस्लामी क्रांति के सिद्धांतों की रक्षा करें और देश की प्रगति में योगदान देते हुए इजरायल तथा अमेरिका की अस्थिर करने वाली चालों के प्रति पूरी तरह सतर्क रहें.