US SC: बिना अमेरिकी धरती पर कदम रखे नहीं मिलेगी शरण
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसले में व्यवस्था दी है कि अगर कोई शरणार्थी अमेरिकी धरती पर कदम नहीं रखता है, तो सरकारी अधिकारी उसे मेक्सिको से सटी दक्षिणी सीमा पर ही रोक सकते हैं या वापस लौटा सकते हैं. शीर्ष अदालत के इस 6-3 के फैसले से डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की उस विवादित नीति को दोबारा लागू करने का रास्ता साफ हो गया है, जिसे 'मीटरिंग' कहा जाता है.
इस नीति के तहत सीमा सुरक्षा एजेंट शरण चाहने वालों को भौतिक रूप से सीमा पार करने से रोकते हैं. अदालत के इस फैसले का रूढ़िवादी न्यायाधीशों ने समर्थन किया, जबकि तीन उदारवादी न्यायाधीशों ने असहमति जताई.
बहुमत का नेतृत्व कर रहे जस्टिस सैमुअल अलिटो ने अपने फैसले में 'इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट' के प्रावधानों का हवाला दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के मुताबिक, केवल वही विदेशी नागरिक शरण के लिए आवेदन कर सकता है या जांच का हकदार है जो 'अमेरिका में प्रवेश' कर चुका हो.
अलिटो ने लिखा कि मेक्सिको की सीमा पर खड़ा कोई भी व्यक्ति कानूनी तौर पर अमेरिका में प्रवेश किया हुआ नहीं माना जा सकता, इसलिए प्रशासन उन्हें रोकने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है.
इस फैसले ने निचले स्तर की अदालत के उस आदेश को पलट दिया है जिसमें इस प्रक्रिया को अवैध घोषित किया गया था. हालांकि, यह नीति ट्रम्प से पहले पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में भी लागू थी, लेकिन जो बाइडेन ने 2021 में इसे समाप्त कर दिया था. अब ट्रम्प प्रशासन इस कड़े रुख को फिर से प्रभावी बनाने जा रहा है.
इस फैसले पर तीखी असहमति जताते हुए जस्टिस सोनिया सोतोमेयर ने इसे अमानवीय और कानून की गलत व्याख्या बताया. उन्होंने कहा कि यह फैसला सरकार को उन शरणार्थियों की व्यक्तिगत जांच से बचने का मौका देता है जो उत्पीड़न से बचकर आए हैं.
सोतोमेयर ने चिंता जताई कि सीमा पर पर्याप्त व्यवस्था होने के बावजूद लोगों को वापस भेजना उन्हें मौत और प्रताड़ना के मुंह में धकेलने जैसा है. उन्होंने बहुमत के फैसले पर तंज कसते हुए कहा कि यह व्याख्या केवल एक शब्द 'इन' पर टिकी है, जबकि इसके व्यापक कानूनी संदर्भ और इतिहास को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है.
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने आव्रजन से जुड़े एक अन्य बड़े फैसले में ट्रम्प प्रशासन को 'टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस' (टीपीएस) के तहत अमेरिका में रह रहे हजारों सीरियाई और हाईटियन नागरिकों के कानूनी संरक्षण को समाप्त करने की भी हरी झंडी दे दी है. इस फैसले से अमेरिका में रह रहे लगभग 3,50,000 हाईटियन और 6,100 सीरियाई नागरिकों के कार्य परमिट रद्द होने और उन्हें निर्वासित किए जाने का खतरा मंडराने लगा है.
यह दर्जा उन देशों के नागरिकों को दिया जाता है जहां युद्ध या प्राकृतिक आपदा के कारण स्थितियां खतरनाक होती हैं. इस मामले में भी जस्टिस अलिटो ने स्पष्ट किया कि टीपीएस से जुड़े कार्यकारी फैसलों की न्यायिक समीक्षा नहीं की जा सकती.
अदालत ने उन दलीलों को भी खारिज कर दिया जिसमें ट्रम्प पर नस्लीय भेदभाव और हाईटियन नागरिकों के खिलाफ भ्रामक प्रचार करने के आरोप लगाए गए थे.