अमेरिकी बहस: ईरान के साथ युद्ध ही अमेरिका में महंगाई की असली वजह?
मिशिगन सीनेट चुनाव में अर्थव्यवस्था और ईंधन की दरें मुख्य मुद्दा बन गई हैं. डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद ने ईरान युद्ध को अमेरिकी आम जनता की जेब पर भारी पड़ता बताया, जबकि रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर युद्ध का बचाव किया.
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के मिशिगन राज्य में होने वाले सीनेट चुनाव की बहस में सबसे पहला सवाल देश की अर्थव्यवस्था को लेकर पूछा गया, जो आम मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. हालांकि, चर्चा जब आगे बढ़ी तो बहस ब्याज दरों, करों या व्यापार नीतियों तक सीमित नहीं रही. डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रगतिशील उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद ने सीधे तौर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के समर्थन वाले रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स पर हमला बोलते हुए अमेरिका-ईरान युद्ध को ही देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों का असली ज़िम्मेदार ठहरा दिया.
अब्दुल अल-सईद का कहना था कि पेट्रोल पंपों पर बढ़ता खर्च और रसोई के सामान की महंगाई सीधे तौर पर मध्य पूर्व में चल रहे इस युद्ध से जुड़ी हुई है. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश को ऐसे सीनेटर की जरूरत है जो ट्रम्प के इस गैर-ज़रूरी युद्ध के खिलाफ वार पावर्स रेजोल्यूशन (युद्ध शक्तियों के प्रस्ताव) का समर्थन करे, न कि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहे.
अर्थव्यवस्था और विदेश नीति का गहराता संबंध
मिशिगन समेत पूरे अमेरिका में डेमोक्रेट्स युद्ध के विरोध को अपने चुनाव प्रचार का मुख्य हथियार बना रहे हैं. उनका मानना है कि युद्ध के कारण आम नागरिकों का बजट बिगड़ चुका है. वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल अफेयर्स (आईजीए) के विशेषज्ञों का भी कहना है कि आम तौर पर लोग विदेश नीति को वोट देने का आधार नहीं बनाते, लेकिन इस समय विदेश नीति और देश की अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से इतनी गहराई से जुड़ चुकी हैं कि विदेशी मामले ही अब घरेलू अर्थव्यवस्था का रूप ले चुके हैं.
हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग साठ प्रतिशत संभावित मतदाता युद्ध के प्रति ट्रम्प प्रशासन के रुख से असहमत दिखे. वहीं, ऐतिहासिक रूप से आठ से अधिक दहाई प्रतिशत लोगों का मानना है कि इस सैन्य संघर्ष ने सीधे तौर पर अमेरिका में जीवन-यापन की लागत बढ़ा दी है.
ऊर्जा संकट और आम जनता की जेब पर असर
फरवरी के आखिर में शुरू हुए इस युद्ध के बाद से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दाम तेजी से बढ़े हैं. अमेरिका में माल ढुलाई और भारी मशीनों में इस्तेमाल होने वाला डीजल रिकॉर्ड महंगे स्तर पर पहुंच चुका है.
इसी तरह, पेट्रोल की कीमतें जो युद्ध से पहले प्रति गैलन तीन डॉलर से कम हुआ करती थीं, वे अब बढ़कर चार डॉलर सत्ताईस सेंट से भी ऊपर पहुंच चुकी हैं. परिवहन और ऊर्जा के मोर्चे पर हुई इस बढ़ोतरी ने पूरे देश में महंगाई को हवा दी है, जिससे चुनावी माहौल में आम आदमी की जेब का सवाल सबसे ऊपर आ गया है.
रिपब्लिकन खेमे की दलील और विरोधाभास
दूसरी ओर, रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स ने बहस के दौरान युद्ध का बचाव करते हुए कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार बना लेता है तो पूरे क्षेत्र पर नियंत्रण खो जाएगा, जिससे पेट्रोल के दाम आठ डॉलर तक भी जा सकते हैं.
हालांकि, रोजर्स और कई अन्य रिपब्लिकन उम्मीदवार अपने प्रचार में युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करने की बात भी कह रहे हैं. रोजर्स के विज्ञापनों में कहा जा रहा है कि युद्ध तुरंत खत्म होना चाहिए. इसके बावजूद, डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिए हैं कि मध्यवधि चुनाव के बाद युद्ध को और तेज किया जा सकता है, और वे इस सैन्य कदम को अपनी बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं.
चुनाव नतीजों पर असर की संभावना
डेमोक्रेट्स का मानना है कि युद्ध को लेकर आम जनता में फैला असंतोष रिपब्लिकन पार्टी की सबसे कमजोर कड़ी है. यही वजह है कि वे हर मंच से इस मुद्दे को उठाकर मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि युद्ध लंबा खींचता है तो महंगाई और बढ़ेगी.
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, मिशिगन का यह मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच की जंग नहीं रह गया है, बल्कि यह इस बात का फैसला करने वाला मंच बन चुका है कि अमेरिका की विदेश नीति वहां के आम नागरिकों की रसोई और बटुए को किस हद तक प्रभावित कर सकती है.