रवि, 25 अक्टू. 2026

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दिल्ली हाईकोर्ट: नेहा बोरा के पुलिस के शांति बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका खारिज

शांति बॉन्ड नोटिस मामले में AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. अदालत ने उनकी याचिका खारिज करते हुए SEM को कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं.

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23 अक्टू. 2026, 07:52 PM 2 मिनट में पढ़ें 88

नेहा बोरा- अध्यक्ष AISA
नेहा बोरा- अध्यक्ष AISA

नई दिल्ली । डेस्क: दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की पुलिस नोटिस के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है. विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के समक्ष शांति बॉन्ड निष्पादित करने के निर्देश देने वाले इस पुलिस नोटिस को नेहा बोरा ने कोर्ट में चुनौती दी थी.

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने रिट याचिका को इस चरण में खारिज करते हुए कहा कि अदालत इस मोड़ पर याचिका को स्वीकार नहीं कर रही है. 

हालांकि, हाईकोर्ट ने राहत प्रदान करते हुए विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे कार्यवाही से संबंधित सभी आवश्यक और प्रासंगिक दस्तावेज नेहा बोरा को उपलब्ध कराएं. मामले में अदालत के विस्तृत आदेश की प्रतीक्षा की जा रही है.

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने 17 अक्टूबर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 के तहत नोटिस जारी कर छात्र नेता को 19 अक्टूबर को SEM के समक्ष पेश होने का आदेश दिया था. 
नोटिस में उनसे कारण बताने को कहा गया था कि जांच अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का व्यक्तिगत बॉन्ड और एक ज़मानत क्यों न ली जाए. BNSS की धारा 126 विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट को अधिकार देती है कि वे ऐसे व्यक्ति से शांति बॉन्ड भरवा सकें, जिससे लोक शांति भंग होने या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की संभावना हो.

नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनाट प्लेस में आयोजित 'लहरा दो तिरंगा' मार्च में शामिल होने जाते समय निवारक हिरासत (Preventive Detention) में लिया गया था और 17 अक्टूबर को रिहा किया गया था. 

नेहा बोरा की ओर से दायर याचिका में पुलिस नोटिस को अस्पष्ट, तथ्यात्मक रूप से गलत और बिना किसी ठोस आधार का बताया गया था. पुलिस की यह कार्यवाही 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में नारेबाजी, जंतर-मंतर पर धारा 163 के उल्लंघन और प्रदर्शन के लिए उकसाने के आरोपों पर आधारित है. 

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि लोकतंत्र में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP