फ्रांस: महंगाई और पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ फिर उग्र प्रदर्शन
फ्रांस में महंगाई और सरकारी नीतियों के खिलाफ आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले हफ्ते हुई हिंसा के बाद इस शनिवार को भी पेरिस सहित कई बड़े शहरों में विशाल प्रदर्शन हुए. पुलिस की कड़ी सुरक्षा और पाबंदियों के बावजूद हजारों छात्र और आम नागरिक अपनी आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर डटे रहे.
नई दिल्ली । डेस्क: फ्रांस में जीवन यापन की बढ़ती लागत, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सामाजिक असमानता को लेकर जनआक्रोश चरम पर पहुंच गया है. शनिवार को देश भर के प्रमुख शहरों में करीब चार लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए. हालांकि पिछले सप्ताहांत की तुलना में इस बार भीड़ में थोड़ी कमी देखी गई, लेकिन कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं. राजधानी पेरिस समेत कई इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और रात ढलते ही प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है.
पेरिस की सड़कों पर छात्र और युवा आक्रोश
पेरिस के दक्षिणी हिस्से से शुरू हुआ यह जुलूस शुरुआत में शांतिपूर्ण था, लेकिन जैसे-जैसे भीड़ आगे बढ़ी, माहौल में तनाव घुल गया. इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और युवा शामिल हुए, जिनका मुख्य उद्देश्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाना था. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे हिंसा और तोड़फोड़ का समर्थन नहीं करते, लेकिन सरकार को आम जनता की आर्थिक तंगी और युवाओं के संघर्ष को समझना होगा. कई छात्रों ने पुलिस की अत्यधिक सख्त कार्रवाई पर भी कड़ा एतराज जताया. शहर के प्रमुख वाणिज्यिक इलाकों में सुरक्षा के लिहाज से दुकानों को लकड़ी के तख्तों से ढक दिया गया था, जबकि लूर्व और मुसे द'ओर्से जैसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक स्थलों को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया.
रूट में अचानक बदलाव से बढ़ा भ्रम और तनाव
पेरिस पुलिस प्रशासन ने अंतिम समय में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शन के निर्धारित रास्ते को बदल दिया. पहले यह मार्च मध्य पेरिस के बास्टिल इलाके से गुजरना था, लेकिन शुक्रवार को हुई एक संदिग्ध गोलीबारी की घटना के बाद इसे शहर के बाहरी इलाके पोर्ते दि ताली की ओर मोड़ दिया गया. व्यापार संघों ने सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन आंदोलन को कमजोर करने और भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश कर रहा है. अचानक रास्ता बदले जाने से स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों में काफी असमंजस देखा गया.
पुलिस बल की भारी तैनाती और झड़पें
पिछले सप्ताहांत हुई भीषण हिंसा और आगजनी की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए फ्रांसीसी सरकार ने इस बार पूरे देश में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे. लगभग सत्तर हजार पुलिस और प्रांतीय बलों के जवानों को तैनात किया गया था, साथ ही महत्वपूर्ण सरकारी भवनों की सुरक्षा के लिए सेना को भी सतर्क रखा गया था. इसके बावजूद, पेरिस के कुछ हिस्सों में काले कपड़ों में चेहरे ढके नकाबपोश प्रदर्शनकारियों के समूह ने पुलिस पर पटाखे और पत्थर फेंके, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया. इसके अलावा लियोन, नीस, मार्सिले और लील जैसे अन्य शहरों में भी पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा.
नागरिक अधिकारों और पाबंदियों पर बहस तेज
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के सुझाव के बाद देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था. सरकार के इन सख्त रवैये ने देश में नागरिक स्वतंत्रता और विरोध दर्ज कराने के संवैधानिक अधिकार को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है. विपक्षी नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि सरकार की प्राथमिकता प्रदर्शनों को दबाने के बजाय जनता की समस्याओं को सुनने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की होनी चाहिए.
यूरोप भर में फैल रही असंतोष की लहर
आर्थिक तंगी और महंगाई का यह संकट केवल फ्रांस तक सीमित नहीं है. यूरोप के कई अन्य देशों में भी जनता का धैर्य जवाब दे रहा है. शनिवार को इटली, स्पेन, पुर्तगाल, बेल्जियम और अल्बानिया में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया गया. इटली की राजधानी और व्यापारिक केंद्रों में भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि पूरे यूरोप में जीवन यापन के बढ़ते खर्च को लेकर असंतोष की एक बड़ी लहर चल रही है.