पहले सत्ता परिवर्तन का दावा अब होर्मुज मार्ग खोलने की जंग- ईरान
ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने कहा है कि संघर्ष की शुरुआत में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना या उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना था. लेकिन महीनों से जारी इस भीषण युद्ध के बाद अब मुख्य संघर्ष केवल होर्मुज की जलडमरूमध्य को दोबारा व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने तक सिमटकर रह गया है.
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के तेहरान टाईम्स की खबर है कि फारस की खाड़ी और होर्मुज की जलडमरूमध्य में ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य टकराव एक नया मोड़ लेता दिख रहा है. ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों का दावा है कि वह दौर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है जब अमेरिकी विमान वाहक पोत बिना किसी डर के इन जलक्षेत्रों में गश्त किया करते थे.
ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ और सेंट्रल खातम अल-अंबिया मुख्यालय के कमांडर मेजर जनरल अली अब्दुल्लाही ने नौसैनिक युद्ध पर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिकी नौसेना को पूरी तरह से निष्प्रभावी कर दिया गया है और अब उन्हें कभी भी फारस की खाड़ी में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. अब्दुल्लाही का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी सेना के दोबारा इस क्षेत्र में लौटने के केवल सपने देखने होंगे.
पहले सत्ता परिवर्तन का दावा अब होर्मुज मार्ग खोलने की जंग
वाशिंगटन और तेल अवीव की ओर से जारी आक्रामक बयानों और नए सैन्य अभियानों की तैयारियों के बीच ईरानी कमांडर का यह बयान आया है. संघर्ष की शुरुआत में अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान में सत्ता परिवर्तन करना या उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना था. लेकिन महीनों से जारी इस भीषण युद्ध के बाद अब मुख्य संघर्ष केवल होर्मुज की जलडमरूमध्य को दोबारा व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने तक सिमटकर रह गया है.
युद्ध की शुरुआत में अमेरिकी प्रशासन ने तेहरान के त्वरित पतन और उसके परमाणु व मिसाइल कार्यक्रमों को पूरी तरह नष्ट करने का वादा किया था. हालाँकि, ईरान ने इस भीषण सैन्य दबाव का डटकर मुकाबला किया और अमेरिकी ठिकानों व इज़राइली ठिकानों पर व्यापक मिसाइल व ड्रोन हमलों के साथ जवाबी कार्रवाई की. इस रणनीति के कारण अमेरिका पर आर्थिक और सैन्य दबाव काफी बढ़ गया है, जिससे ऊर्जा कीमतों में उछाल और वैश्विक बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली है.
अमेरिकी बयानों में विरोधाभास और सैन्य ठिकानों को नुकसान
ईरानी नेतृत्व ने अमेरिकी बयानों में मौजूद विरोधाभासों पर भी तंज कसा है. अब्दुल्लाही ने कहा कि एक तरफ अमेरिकी नेतृत्व दावा करता है कि उसने ईरान की परमाणु और सैन्य सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ वह लगातार यह दोहराता रहता है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सब कुछ नष्ट हो चुका है, तो अमेरिकी युद्धपोत और विमान वाहक पोत ईरान की समुद्री और जमीनी सीमाओं के करीब आने की हिम्मत क्यों नहीं जुटा पा रहे हैं?
ईरानी सैन्य आकलनों के अनुसार, फारस की खाड़ी के आसपास स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लगातार निशाना बनाया गया है. बहरीन में स्थित अमेरिकी पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) के मुख्यालय को भारी मिसाइल और ड्रोन हमलों से गंभीर नुकसान पहुँचाया गया है. यही कारण है कि अमेरिकी विमान वाहक पोत अब फारस की खाड़ी के बजाय अरब सागर और उत्तरी हिंद महासागर के दूरदराज इलाकों में तैनात रहने को मजबूर हैं.
क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद मोज्तबा खामेनेई के संदेशों का हवाला देते हुए ईरानी अधिकारियों ने कहा कि दुश्मन बलों को होर्मुज जलडमरूमध्य के रक्षकों से करारा झटका लगा है. इसके चलते अमेरिकी बेड़े अब आगे बढ़ने के बजाय अरब सागर तक ही सीमित हो गए हैं.
सैन्य और रणनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि फारस की खाड़ी का सुरक्षा ढांचा अब पहले जैसा नहीं रहेगा. पिछले तीन दशकों से यह क्षेत्र अमेरिकी नौसैनिक वर्चस्व और बिना किसी रुकावट के समुद्री आवाजाही पर टिका हुआ था. लेकिन अब ईरान ने यह साबित कर दिया है कि वह अपनी तटीय रक्षा प्रणालियों, एंटी-शिप मिसाइलों और ड्रोन क्षमताओं के बल पर इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को नियंत्रित करने में सक्षम है. तेहरान का स्पष्ट संदेश है कि फारस की खाड़ी अब किसी बाहरी शक्ति के लिए आसान रास्ता नहीं, बल्कि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा की मुख्य रक्षा पंक्ति बन चुकी है.