नकटी बुलडोजर एक्शन पर विधानसभा में भारी हंगामा
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान नवा रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई का मुद्दा गरमा गया है. इस डिमोलिशन ड्राइव को लेकर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. विपक्षी दल कांग्रेस के सदस्यों ने इस मुद्दे पर जमकर नारेबाजी की और सरकार के विरोध में सदन के गर्भगृह में उतर आए, जिसके बाद नियमों के तहत वे स्वतः ही निलंबित हो गए.
दरअसल, विपक्ष ने इस कार्रवाई को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाकर चर्चा कराने की मांग की थी, जिसे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नामंजूर कर दिया था.
इस पूरे विवाद पर सरकार का पक्ष रखते हुए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने बुलडोजर कार्रवाई को पूरी तरह नियमानुकूल और वैधानिक बताया. उन्होंने सदन को जानकारी दी कि नकटी गांव में अतिक्रमण की शिकायत मिलने के बाद प्रशासन द्वारा विस्तृत जांच की गई थी. जांच में अवैध कब्जा पाए जाने के बाद साल 2025 में ही बेदखली का आदेश जारी कर दिया गया था, जिसके अनुपालन में बीती 28 जून को यह कार्रवाई अमल में लाई गई.
मंत्री ने विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें बारिश के दौरान जल्दबाजी में तोड़फोड़ करने की बात कही गई थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावितों को अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था और सभी पात्र परिवारों के पुनर्वास के लिए नवा रायपुर के सेक्टर-30 में फ्लैट आवंटित कर उन्हें उनके सामान सहित सुरक्षित वहां विस्थापित किया गया है.
दूसरी तरफ, विपक्ष ने इस विस्थापन प्रक्रिया को अमानवीय बताते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया. नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि नकटी गांव में जिन 85 मकानों पर बुलडोजर चलाया गया, उनमें से कई घर प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बने हुए थे, जहां बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद थीं.
उन्होंने सरकार द्वारा दिए जा रहे नए आवासों को अपर्याप्त बताया.
वहीं, कांग्रेस विधायक लखेश्वर बघेल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायकों की नई कॉलोनी बनाने के लिए गरीबों के आशियाने उजाड़ना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है. उन्होंने मांग की कि तोड़फोड़ से पहले प्रभावित लोगों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए थे.
इस बहस के दौरान भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी अपनी बात रखी और कहा कि अगर विधायक कॉलोनी के लिए भूमि अधिग्रहण या अन्य संबंधित सरकारी दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो उन्हें पारदर्शिता के साथ सदन के पटल पर रखा जाना चाहिए.