बेकसूर को 6 साल जेल में रखने पर यूपी सरकार को ₹6 लाख मुआवजे का आदेश
आगरा के एक हत्या के मामले में 6 साल तक बिना पुख्ता सबूतों के जेल में बंद रहे आरोपी को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया है. अदालत ने पुलिस की ढीली जांच पर गहरी नाराजगी जताते हुए राज्य सरकार को पीड़ित को 6 लाख रुपये का मुआवजा देने का फैसला सुनाया.
नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश पुलिस की ढीली और गैर-जिम्मेदाराना जांच प्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है. 2019 के आगरा हत्या मामले में छह साल तक जेल में बंद रहने के बाद बरी हुए एक आरोपी को राहत देते हुए शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पीड़ित को 6 लाख रुपये का मुआवजा दे.
अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जांच और अभियोजन एजेंसियों का मकसद केवल किसी भी तरह से सजा दिलाना नहीं होना चाहिए.
यह आदेश न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने अरुण उर्फ दीपक द्वारा दायर की गई जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया.
याचिकाकर्ता नवंबर 2019 से जेल में बंद था और पूरा मामला केवल परिस्थितियों पर आधारित साक्ष्यों पर टिका था. इसी वर्ष मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत को तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था.
निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करते हुए जस्टिस चंद्रन ने लिखा कि अभियोजन पक्ष ने केवल छह गवाह पेश किए थे और याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं होने के बावजूद उसे छह साल तक विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रखा गया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की लापरवाही भरी जांच के आधार पर चलाया गया मुकदमा न्याय प्रणाली पर सवाल खड़े करता है, जिसमें गनीमत यह रही कि आखिरकार बेकसूर आरोपी बरी हो गया.