ट्रम्प की भारत को कड़ी प्रतिबंधों की धमकी, भारत अड़ा
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद न करने पर द्वितीय और तृतीय चरण के कड़े प्रतिबंधों की चेतावनी दी है. यह बयान 3 सितंबर, 2025 को व्हाइट हाउस में पोलैंड के राष्ट्रपति केयरोल नावरोकी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान आया.
एक पोलिश पत्रकार के रूस के खिलाफ कार्रवाई न करने के सवाल पर ट्रम्प भड़क गए और भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि नई दिल्ली रूस के कच्चे तेल की सबसे बड़ी खरीदारों में से एक है, जिसके कारण क्रेमलिन को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है.
ट्रम्प ने दावा किया, "भारत पर पहले से लगाए गए प्रतिबंधों से रूस को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है. अगर नई दिल्ली ने रूसी तेल आयात बंद नहीं किया, तो उसे और बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा."
उन्होंने द्वितीय और तृतीय चरण के प्रतिबंधों का जिक्र किया, हालांकि इनका विवरण स्पष्ट नहीं किया. दूसरी ओर, भारत की मोदी सरकार ने राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए रूस से 'तरल सोना' का आयात कम न करने का स्पष्ट रुख अपनाया है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा, "किसी भी स्थिति में रूसी तेल का आयात कम नहीं होगा, क्योंकि यह भारत के आर्थिक और ऊर्जा हितों के लिए महत्वपूर्ण है."
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प भारत के उत्पादों पर 500% तक शुल्क बढ़ा सकते हैं.
जुलाई 2025 में अमेरिकी सीनेटरों लिंडसे ग्राहम और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत पर 500% शुल्क लगाने का विधेयक पेश किया था, जिसका उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना था.
वर्तमान में भारत के टेक्सटाइल, चमड़ा, आभूषण और रासायनिक उत्पादों पर 50% शुल्क लागू है, लेकिन दवाएं, स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इससे बाहर हैं. विश्लेषकों का कहना है कि ये क्षेत्र भी अब उच्च शुल्क के दायरे में आ सकते हैं, जिससे भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है.
भारत और अमेरिका के बीच तनाव जुलाई 2025 से बढ़ा, जब ट्रम्प प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया, जिससे कुल शुल्क 50% हो गया. तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मुलाकात ने ट्रम्प को और नाराज किया.
पुतिन ने बैठक के बाद ट्रम्प को चेतावनी दी, "भारत और चीन जैसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों को शुल्क की धमकी नहीं दी जा सकती. 150 करोड़ की आबादी और शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाला भारत आपके सामने है."
इस बीच, भारत वैकल्पिक बाजारों की तलाश में जुटा है. यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है.
4 सितंबर, 2025 को यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मोदी से फोन पर बात की.
जर्मनी ने भारत के साथ व्यापार दोगुना करने और ईयू-भारत एफटीए का समर्थन करने का वादा किया है. जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक के बाद कहा, "अगर कोई देश भारत के व्यापार में बाधा डालता है, तो जर्मनी उसे दूर करने की कोशिश करेगा."
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में रणनीति बनाई है. आरबीआई ने अमेरिकी बॉन्ड बेचने और सोना खरीदने की प्रक्रिया तेज कर दी है.
ट्रम्प के नए प्रतिबंधों से भारत-अमेरिका के बीच रक्षा और व्यापारिक समझौते, जैसे COMCASA, BECA, iCET और LEMOA, खतरे में पड़ सकते हैं.
इसके अलावा, अमेरिका से हथियारों की आपूर्ति और रखरखाव पर असर पड़ सकता है, जिससे भारतीय सेना को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
रूस के राष्ट्रपति पुतिन दिसंबर 2025 में नई दिल्ली का दौरा करेंगे, जहां भारत और रूस के बीच रक्षा और व्यापारिक समझौतों की संभावना है.
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प की धमकियों के बावजूद भारत रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखेगा, क्योंकि यह राष्ट्रीय हित में है. रूस 2022 के यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत को सस्ता तेल बेच रहा है, जिसे ट्रम्प क्रेमलिन को आर्थिक मदद मानते हैं.
हालांकि, मोदी सरकार का कहना है कि अमेरिका भी रूस के साथ व्यापार कर रहा है, इसलिए भारत पर दोष लगाना अनुचित है.
ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा, "लगता है हम भारत और रूस को चीन के अंधेरे में खो चुके हैं. उनके भविष्य की समृद्धि की कामना करता हूं."
बाद में उन्होंने इस बयान को अलग अर्थ दे दिया. दूसरी ओर, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी ट्रम्प की नीतियों की आलोचना की और भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही. (फोटो- प्रतीकात्मक)