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टैरिफ के ज़रिये तीसरा विश्वयुद्ध!

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20 जन. 2026, 07:27 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

त्वरित टिप्पणी । सीजीखबर डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की मर्यादाओं को लांघते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को खुली धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि यदि फ्रांस ने उनके “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने से इंकार किया, तो फ्रांस की शराब पर 200 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया जाएगा.


यह कोई साधारण व्यापारिक विवाद नहीं है. यह आर्थिक दंड को राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का एक और उदाहरण है. अब यह कहना गलत नहीं होगा कि डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ के ज़रिये एक प्रकार का वैश्विक युद्ध छेड़ रखा है- एक ऐसा युद्ध जिसमें मिसाइलें नहीं, बल्कि सीमा शुल्क और आर्थिक प्रतिबंध हथियार हैं.

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इससे पहले भी ट्रंप यूरोप के आठ देशों को धमकी दे चुके हैं कि यदि उन्होंने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका का समर्थन नहीं किया, तो उन पर टैरिफ लगाए जाएंगे. चीन, भारत, मैक्सिको, कनाडा- शायद ही कोई ऐसा बड़ा या मध्यम देश बचा हो जिस पर ट्रंप प्रशासन ने किसी न किसी बहाने टैरिफ न थोपा हो.


ट्रंप की टैरिफ सूची में फिलहाल मेक्सिको, कनाडा, चीन, भारत, यूरोपीय संघ, ब्राज़ील, वियतनाम, जापान, दक्षिण कोरिया, डेनमार्क शामिल हैं और अब इसमें फ्रांस का नाम भी जुड़ने जा रहा है.


एक बार महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन से पूछा गया था कि तीसरा विश्वयुद्ध कैसे लड़ा जाएगा. उन्होंने उत्तर दिया था- “मुझे नहीं पता तीसरा विश्वयुद्ध कैसे लड़ा जाएगा, लेकिन चौथा विश्वयुद्ध पत्थरों से लड़ा जाएगा.”


आइंस्टीन का आशय था कि तीसरा विश्वयुद्ध परमाणु हथियारों से मानव सभ्यता को नष्ट कर देगा और उसके बाद मानवता आदिम अवस्था में लौट जाएगी.


लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया ही रास्ता खोज लिया है- बिना परमाणु हथियारों के, टैरिफ के ज़रिये तीसरा विश्वयुद्ध.


यह युद्ध बंदूकों से नहीं, बल्कि महँगाई, बेरोज़गारी, उत्पादन ठप होने और वैश्विक आपूर्ति शृंखला के टूटने के ज़रिये लड़ा जा रहा है.


यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप की इस नीति से अमेरिका को कितना वास्तविक लाभ हुआ है, लेकिन इतना साफ़ है कि दुनिया भर में महँगाई बढ़ रही है, लोगों की क्रयशक्ति घट रही है और गरीबी तेज़ी से बढ़ रही है.


अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि लंबे समय तक चले टैरिफ युद्ध से वैश्विक मंदी का ख़तरा बढ़ जाता है.


विडंबना यह है कि विश्व-व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना में सबसे बड़ी भूमिका खुद अमेरिका की रही है. WTO के मूल सिद्धांतों में शामिल हैं- किसी एक देश के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता, आयातित और घरेलू उत्पादों के साथ समान व्यवहार, एकतरफा टैरिफ पर रोक, बिना बातचीत और विवाद-निपटान प्रक्रिया के मनमाने टैरिफ नहीं लगाए जा सकते. व्यापार विवादों का समाधान धमकी से नहीं, बल्कि संस्थागत प्रक्रिया से किया जाएगा.


आज वही अमेरिका, और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इन सभी सिद्धांतों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं. जो देश ट्रंप की राजनीतिक शर्तें मानने से इंकार करता है, उस पर टैरिफ थोप दिया जाता है चाहे वह मित्र देश ही क्यों न हो.


दरअसल, ट्रंप के पास अब यही एक बड़ा हथियार बचा है. न सैन्य हस्तक्षेप संभव है, न वैश्विक नैतिक नेतृत्व इसलिए वे आर्थिक दबाव के ज़रिये दुनिया को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं.


लेकिन इतिहास गवाह है कि जब व्यापार को युद्ध में बदला जाता है तो उसका अंत किसी की जीत में नहीं बल्कि सामूहिक नुकसान में होता है.


डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ युद्ध केवल देशों के बीच नहीं है यह मानव सभ्यता की आर्थिक स्थिरता के ख़िलाफ़ युद्ध है और इसके परिणाम आने वाले दिनों में और ज़्यादा भयावह हो सकते हैं.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP