खरीफ सीजन के लिए देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार: FAI
नई दिल्ली । डेस्क: फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने मंगलवार, 10 मार्च 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए देश के कृषि क्षेत्र को बड़ी राहत दी है. FAI के अनुसार, आगामी खरीफ सीजन के लिए यूरिया और फॉस्फेटिक उर्वरकों की आपूर्ति 'पूरी तरह पर्याप्त' बनी हुई है. हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों ने वैश्विक स्तर पर उर्वरक व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं, लेकिन भारत के पास वर्तमान में मौजूद इन्वेंट्री और बेहतर आपूर्ति प्रबंधन किसी भी संभावित संकट से निपटने के लिए पर्याप्त है.
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि वे केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं ताकि देश के हर हिस्से में उर्वरकों का वितरण सुचारू रूप से सुनिश्चित किया जा सके.
आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले दस महीनों में भारत ने यूरिया, डीएपी, कॉम्प्लेक्स, एसएसपी और एमओपी के उत्पादन और आयात में बड़ी बढ़त दर्ज की है. पिछले वर्ष के 57 मिलियन टन के मुकाबले इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 65 मिलियन टन तक पहुंच गया है.
विशेष रूप से डीएपी और एनपीके (NPK) के स्टॉक में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 70-80% की भारी वृद्धि हुई है. वर्तमान में भारत कृषि के 'लीन सीजन' में है, जिसका लाभ उठाते हुए उद्योग जगत अपने भंडारों को फिर से भर रहा है और उत्पादन इकाइयों में नियमित रखरखाव का कार्य पूरा कर रहा है, ताकि जून से शुरू होने वाले खरीफ सीजन में मांग को बिना किसी देरी के पूरा किया जा सके.
यूरिया उत्पादन के लिए आवश्यक रीगैसीफाइड लिक्विफाइड नेचुरल गैस (RLNG) की निर्भरता मुख्य रूप से पश्चिम एशिया पर है.
मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों ने गैस आपूर्ति को प्रभावित जरूर किया है, लेकिन FAI ने कहा कि उद्योग जगत सरकार के साथ मिलकर यूरिया उत्पादन के लिए गैस आवंटन को प्राथमिकता देने पर लगातार काम कर रहा है.
इसके अलावा, फॉस्फेटिक उर्वरकों के मामले में भारत ने अपनी निर्भरता केवल एक क्षेत्र पर न रखते हुए मोरक्को, जॉर्डन, सऊदी अरब, रूस और बेलारूस जैसे देशों से आपूर्ति के दीर्घकालिक समझौते किए हैं.
आईपीएल, कोरोमंडल और पीपीएल जैसी कंपनियां कच्चे माल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर नजर रखे हुए हैं. उद्योग जगत सरकार के साथ इस बात पर भी चर्चा करेगा कि 'पोषक तत्व आधारित सब्सिडी' (NBS) की दरों में कच्चे माल की कीमतों और विनिमय दर में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखा जाए, ताकि किसानों को उचित दाम पर खाद मिलती रहे. Symbolic Photo