नीदरलैंड में टाटा स्टील पर प्रदूषण के आरोपों में $1.6 B का मुकदमा दर्ज
नई दिल्ली । डेस्क: नीदरलैंड में टाटा स्टील पर प्रदूषण के आरोप में $1.6 billion का मुकदमा दायर कर दिया गया है. नीदरलैंड के एक गैर-लाभकारी संगठन 'स्टिचिंग फ्रिसे विंड' (SFW) ने भारतीय दिग्गज कंपनी टाटा स्टील के खिलाफ उत्तरी हॉलैंड की अदालत में 1.6 बिलियन डॉलर (लगभग 13,000 करोड़ रुपये से अधिक) का हर्जाना मांगते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू की है.
संगठन का आरोप है कि टाटा स्टील के इजा़मुइडेन (Ijmuiden) स्थित प्लांट से होने वाले प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है और उनकी संपत्तियों के दाम गिर गए हैं.
हालांकि, टाटा स्टील ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और काल्पनिक बताते हुए खारिज कर दिया है.
यह कानूनी चुनौती ऐसे समय में आई है जब टाटा स्टील यूरोप में अपने परिचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर 'डीकार्बोनाइजेशन' योजना पर काम कर रही है.
कंपनी नीदरलैंड सरकार से अपनी 6.5 बिलियन यूरो की 'ग्रीन स्टील योजना' के लिए 2 बिलियन यूरो की वित्तीय सहायता की उम्मीद कर रही है.
गौर करने वाली बात यह है कि टाटा स्टील पहले से ही डच नियामकों के दबाव में है, जहां जहरीले उत्सर्जन को कम न करने पर भारी जुर्माना और कोकिंग कोल प्लांट बंद करने जैसी चेतावनियां दी गई हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ताजा मुकदमे का फैसला आने में 4 से 6 साल का समय लग सकता है, इसलिए फिलहाल कंपनी की वित्तीय स्थिति पर इसका तत्काल कोई बड़ा असर होने की संभावना नहीं है.