छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू की दस्तक: 3 साल की बच्ची में H1N1 संक्रमण की पुष्टि
दुर्ग । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्वाइन फ्लू (H1N1) का एक मामला सामने आया है. यहां लगभग तीन साल (दो साल 11 महीने) की एक बच्ची में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई है. बच्ची का इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, बच्ची फिलहाल पूरी तरह से खतरे से बाहर है और उसकी स्थिति स्थिर बनी हुई है.
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि बच्ची को सर्दी और तेज बुखार की शिकायत के बाद उसके परिजनों ने अस्पताल में दिखाया था. लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू का संदेह हुआ, जिसके बाद आवश्यक जांच कराई गई.
टेस्ट रिपोर्ट में H1N1 संक्रमण की पुष्टि होने के बाद, एहतियात के तौर पर बच्ची को तुरंत अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. वहां वह डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही है.
इस नए मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है. निवारक कदम उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्ची के परिवार के अन्य सदस्यों की भी निगरानी कर रही है, ताकि उनमें किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि H1N1 सहित मौसमी इन्फ्लूएंजा से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह उचित देखभाल और पर्याप्त आराम से ठीक हो जाता है. बुखार, खांसी, सिरदर्द और बदन दर्द इसके सामान्य लक्षण हैं. सही समय पर चिकित्सकीय परामर्श लेने से मरीज जल्दी रिकवर हो जाते हैं.
स्वाइन फ्लू
स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन बीमारी है, जो मुख्य रूप से H1N1 नामक इन्फ्लूएंजा 'ए' वायरस के कारण होती है. इसे वैज्ञानिक भाषा में H1N1 स्वाइन इन्फ्लूएंजा कहा जाता है. शुरुआत में यह वायरस सूअरों (swine) में पाया गया था, जिसके कारण इसे 'स्वाइन फ्लू' नाम मिला, लेकिन अब यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलने वाला सामान्य मौसमी फ्लू बन चुका है. यह बीमारी मरीज के छींकने, खांसने या संक्रमित सतहों को छूने के बाद मुंह, नाक या आंखों को स्पर्श करने से फैलती है.
स्वाइन फ्लू के लक्षण आम मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे ही होते हैं, लेकिन ये अचानक और तीव्र रूप से सामने आते हैं. मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, तेज बदन दर्द, ठंड लगना और अत्यधिक थकान शामिल हैं. कुछ मामलों में उल्टी या दस्त की शिकायत भी हो सकती है.
सामान्यतः अधिकांश लोग उचित देखभाल, पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों के सेवन से 1 से 2 सप्ताह में पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, क्योंकि यह बीमारी अधिकांशतः सेल्फ-लिमिटिंग (खुद-ब-खुद ठीक होने वाली) होती है. हालांकि, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी जैसे एस्थमा, डायबिटीज या हृदय रोग से पीड़ित लोगों में इसके गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक होता है.
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए स्वच्छता और एहतियात सबसे महत्वपूर्ण हैं. नियमित रूप से हाथों को साबुन और पानी से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या टिशू से ढकना, और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क का उपयोग करना इसके प्रसार को रोकता है.
फ्लू के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए, क्योंकि शुरुआती 48 घंटों में दी जाने वाली एंटीवायरल दवाएं बीमारी के प्रभाव को काफी कम कर देती हैं. इसके अलावा, सालाना इन्फ्लूएंजा वैक्सीन (फ्लू का टीका) लगवाकर भी इस बीमारी के खतरे से सुरक्षित रहा जा सकता है.