सुरक्षित सड़क जीवन के अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित, सुगम और अच्छी तरह से बनाए रखी गई सड़कों तक पहुंच भारत के संविधान के तहत जीवन के मूल अधिकार का एक आवश्यक हिस्सा है.
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में यात्रा करने का अधिकार एक मूल अधिकार है. जस्टिस महादेवन, जिन्होंने हालिया फैसले को लिखा, ने कहा, “चूंकि देश के किसी भी हिस्से में पहुंचने का अधिकार, कुछ अपवादों और परिस्थितियों में प्रतिबंधों के साथ, संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के तहत गारंटीकृत मूल अधिकार है, इसलिए सुरक्षित, अच्छी तरह से बनाये रखी और सुगम सड़कों का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा माना जाता है.”
अदालत ने कहा कि सड़कों का विकास और रखरखाव पूरी तरह से राज्य की जिम्मेदारी है. “राज्य का यह कर्तव्य है कि वह अपने नियंत्रण वाली सड़कों का विकास और रखरखाव करे,” अदालत ने उल्लेख किया.
यह फैसला उमरी पूफ प्रतापपुर (यूपी) टोलवेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ दायर एक अपील पर आधारित था.
यह अपील मध्य प्रदेश में उमरी-पूफ-प्रतापपुर रोड के विकास के लिये ‘बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर’ आधार पर किये गये एक रियायती समझौते पर राज्य उच्च न्यायालय के निर्णय के खिलाफ थी.
इस परियोजना की कुल लागत 73.68 करोड़ रुपये थी, जो उमरी गांव में स्टेट हाईवे 45 के टी-जंक्शन से उमरी-पूफ-प्रतापपुर खंड के 43.775 किमी तक मौजूदा सड़क के विस्तार के लिये थी.