SC ने NHAI को समय दिया, किसानों के मुआवजे पर 17 मार्च को सुनवाई
नई दिल्ली । डेस्क: बिलासपुर-रायपुर फोर लेन और सिक्स लेन सड़क परियोजना के लिए 2012 में अधिग्रहित अपनी जमीन खो चुके छत्तीसगढ़ के किसानों को लंबे कानूनी संघर्ष के बाद न्याय मिलने की मजबूत उम्मीद जगी है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को मुआवजे के वितरण में मौजूद खामियों को दूर करने के लिए अतिरिक्त समय दिया है.
सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट रूप से माना कि मुआवजा निर्धारण और वितरण में कुछ असंगतियां हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है. उन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार से भी इस पर चर्चा कर अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया.
जस्टिस दीपंकर दत्ता और जस्टिस सतीश शर्मा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर गौर किया. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रणव सचदेवा और सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि यह विवाद पिछले 12-14 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर चल रहा है. इसमें दो बार मध्यस्थता, दो बार जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय की सुनवाई हो चुकी है.
याचिकाकर्ताओं ने जोर दिया कि राज्य सरकार के नए दिशानिर्देश केवल ताजा मामलों पर लागू होंगे, पुराने प्रकरणों पर नहीं. साथ ही, उच्च न्यायालय की दो खंडपीठों ने पहले ही फैसला दिया था कि अधिक जमीन वाले किसानों को कम मुआवजा देना उचित नहीं है.
सड़क किनारे समान स्थिति वाली जमीनों के लिए छोटे-बड़े किसानों को एक समान दर पर मुआवजा मिलना चाहिए. एनएचएआई ने इस उच्च न्यायालय फैसले को चुनौती दी है.
किसानों का कहना है कि दो उपलब्ध दरों में से एक को पहले ही विभिन्न अदालतों ने खारिज कर दिया है, इसलिए बाकी विकल्प के आधार पर ही मुआवजा तय किया जाए और नए मुकदमे की कोई आवश्यकता नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए एनएचएआई और राज्य सरकार को अपना पक्ष मजबूती से रखने का मौका देते हुए मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित की है. यह सुनवाई हाईकोर्ट के स्लैब आधारित मुआवजे के फैसले पर केंद्रित रहेगी.