अंधविश्वास ने ली युवक की जान, कुत्ते के काटने के 5 महीने बाद रेबीज से मौत
अंबिकापुर । संवाददाता: सरगुजा संभाग में अंधविश्वास और चिकित्सा के प्रति लापरवाही का एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है. बलरामपुर जिले के महाराजगंज निवासी 35 वर्षीय युवक रामजीत राम की रेबीज के कारण मौत हो गई. विडंबना यह है कि पिछले साल नवंबर में कुत्ते के काटने के बाद परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय देसी जड़ी-बूटियों और झाड़-फूंक के भरोसे रखा.
जब तक उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया, तब तक संक्रमण उसके मस्तिष्क तक फैल चुका था.
जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2025 में गांव में एक कुत्ते ने रामजीत को काट लिया था. उस समय उचित एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाने के बजाय परिजनों ने घरेलू उपचार को प्राथमिकता दी. घाव भरने के बाद परिवार को लगा कि वह खतरे से बाहर है.
हालांकि, पांच महीने बाद अचानक रामजीत की स्थिति बिगड़ने लगी. उसे शरीर में तेज जकड़न, बुखार और पानी से डर (हाइड्रोफोबिया) जैसे लक्षण महसूस होने लगे. उसकी हरकतों में आए बदलाव को देखकर परिजन घबरा गए और उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज ले आए, लेकिन इलाज शुरू होने के कुछ ही घंटों बाद उसने दम तोड़ दिया.
बता दें कि पिछले डेढ़ महीने के भीतर इस क्षेत्र में रेबीज से मौत का यह दूसरा मामला है. इससे पहले दरिमा क्षेत्र में भी एक युवक की जान चली गई थी. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है जिसका एकमात्र बचाव समय पर टीकाकरण ही है.
जड़ी-बूटी या झाड़-फूंक इस संक्रमण को रोकने में पूरी तरह बेअसर होते हैं. डॉक्टरों ने अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने पर तत्काल अस्पताल पहुंचकर पूरा वैक्सीनेशन कोर्स करवाएं.
गौरतलब है कि कुत्ते के काटने से होने वाली सबसे खतरनाक और जानलेवा बीमारी रेबीज है. यह एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से संक्रमित जानवर की लार के माध्यम से फैलता है. जब रेबीज का वायरस शरीर में प्रवेश करता है, तो यह तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे मस्तिष्क में सूजन आ जाती है.
इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में पानी से डर लगना (Hydrophobia), हवा से डर लगना, तेज बुखार, घाव वाली जगह पर झुनझुनी होना और व्यवहार में अत्यधिक आक्रामकता या पागलपन शामिल है. दुखद बात यह है कि एक बार यदि रेबीज के लक्षण शरीर में प्रकट हो जाएं, तो इसका कोई इलाज संभव नहीं है और मृत्यु लगभग निश्चित हो जाती है.
रेबीज से बचाव का एकमात्र और सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है. जैसे ही कोई कुत्ता या अन्य जानवर काटे, सबसे पहले उस घाव को बहते हुए पानी और साबुन से कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए.
यह प्रक्रिया वायरस के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देती है. इसके तुरंत बाद डॉक्टर से संपर्क कर एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का पूरा कोर्स शुरू करना चाहिए.
इसमें लापरवाही या देसी जड़ी-बूटियों और झाड़-फूंक का सहारा लेना जानलेवा साबित हो सकता है. इसके अलावा, अपने पालतू कुत्तों को भी नियमित रूप से रेबीज का टीका लगवाना चाहिए और लावारिस जानवरों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए ताकि संक्रमण के खतरे को जड़ से खत्म किया जा सके. Symbolic Photo