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होमो नालेदी ने साबित किया दिमाग का आकार मायने नहीं रखता

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15 दिस. 2025, 09:19 AM 3 मिनट में पढ़ें 3

होमो नालेदी क्रबगाह
होमो नालेदी क्रबगाह

जोहान्सबर्ग । डेस्क: प्राचीन मानवों की बुद्धिमत्ता को हमेशा उनके मस्तिष्क के आकार से जोड़ा जाता रहा है. बड़ा दिमाग, ज्यादा बुद्धि- यही प्रचलित धारणा है. लेकिन दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध राइजिंग स्टार गुफा से मिले नवीनतम पुरातात्विक प्रमाण इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं. यहां होमो नालेदी नामक प्राचीन मानव प्रजाति ने करीब 2 लाख साल पुराने कब्रों का निर्माण किया था, जबकि उनका दिमाग आधुनिक इंसानों के मुकाबले मात्र एक तिहाई आकार का था- लगभग नींबू जितना!


यह खोज जोहान्सबर्ग के विटवाटर्सरैंड विश्वविद्यालय के प्रमुख पुरातत्वविद् ली बर्गर के नेतृत्व वाली टीम ने की है. 2013 में शुरू हुए खुदाई अभियान के दौरान गुफा से 1,500 से अधिक हड्डियों के जीवाश्म मिले थे, जो होमो नालेदी प्रजाति के कम से कम 15 व्यक्तियों के थे. हालिया खुदाई (2017-18) में गुफा के कुछ चैंबर्स में पेलियोलिथिक चट्टानों के नीचे व्यवस्थित रूप से रखी लाशें और कब्रें मिलीं. विशेषज्ञों का कहना है कि ये कब्रें जानबूझकर बनाई गई थीं, न तो पानी की धारा या भूस्खलन के निशान मिले, न ही उस क्षेत्र में रहने के सबूत.

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होमो नालेदी प्रजाति की ऊंचाई लगभग पांच फीट थी, उनके हाथ-पैर थोड़े मुड़े हुए थे, लेकिन वे वस्तुओं को पकड़कर इस्तेमाल कर सकते थे. फिर भी, उनका छोटा मस्तिष्क उन्हें जटिल व्यवहारों से दूर नहीं रख सका. यह खोज साबित करती है कि आधुनिक मानव (होमो सेपियंस) के आगमन से बहुत पहले- करीब 3 से 3.5 लाख साल पहले- अन्य मानव प्रजातियां भी उन्नत क्रियाकलाप कर रही थीं. आधुनिक मानव अफ्रीका में 3 लाख साल पहले प्रकट हुए थे, लेकिन तब पृथ्वी पर होमो जीनस की कई अन्य प्रजातियां भी मौजूद थीं.


खोज की और रोचक बातें सामने आई हैं. गुफा की दीवारों पर ज्यामितीय डिजाइन उकेरे गए पाए गए, जो प्रतीकात्मक सोच का संकेत देते हैं. प्रिंसटन विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् ऑगस्टिन फुएंटेस का कहना है, "यह सृजनात्मकता और प्रतीक चिह्नों का प्रमाण है, जो पहले केवल आधुनिक मानवों को जिम्मेदार ठहराया जाता था. अधिक शोध से यह सिद्ध हो सकता है कि बुद्धिमत्ता का विकास मस्तिष्क के आकार पर ही निर्भर नहीं."


यह खोज मानव विकास के इतिहास को नया मोड़ दे रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि होमो नालेदी ने न केवल दफन की परंपरा शुरू की, बल्कि आग का नियंत्रित उपयोग भी कर सकते थे जो चार लाख साल पुरानी अन्य खोजों से जुड़ता है. वैज्ञानिक जगत में यह बहस छेड़ रही है: क्या छोटा मस्तिष्क भी जटिल संस्कृति को जन्म दे सकता है? राइजिंग स्टार गुफा, जो दक्षिण अफ्रीका का प्रमुख पुरातात्विक स्थल है, आगे और रहस्य उजागर करने को तैयार है. (Symbolic Photo)

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP