छत्तीसगढ़ के जयदीप की डायबिटीज पर बड़ी खोज
रायपुर | संवाददाता: भारत समेत पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे टाइप-2 डायबिटीज के मामलों के बीच छत्तीसगढ़ के एक युवा वैज्ञानिक ने ऐसी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज में अहम भूमिका निभाई है, जो भविष्य में इस बीमारी के इलाज और रोकथाम की दिशा बदल सकती है.
जशपुर जिले के बागबहार गांव के रहने वाले वैज्ञानिक डॉ. जयदीप शर्मा भारतीय वैज्ञानिकों की उस शोध टीम का हिस्सा हैं, जिसने यह पता लगाया है कि मांसपेशियों की कमजोरी और टाइप-2 डायबिटीज के बीच गहरा और सीधा संबंध है.
यह महत्वपूर्ण शोध फरीदाबाद स्थित रीजनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरसीबी) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है. शोध के नतीजे विश्व की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका ‘साइंस एडवांसेज’ में प्रकाशित हुए हैं. इस अध्ययन का नेतृत्व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रोफेसर सैम जे. मैथ्यू ने किया, जबकि डॉ. जयदीप शर्मा इस शोध के प्रमुख शोधकर्ताओं में शामिल रहे. इस पूरे शोध को यहां क्लिक कर के पढ़ सकते हैं.
आमतौर पर लोग मांसपेशियों को केवल शरीर की ताकत, फिटनेस और शारीरिक गतिविधियों से जोड़कर देखते हैं. लेकिन इस शोध ने साबित किया है कि मांसपेशियां शरीर में ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर की मांसपेशियां रक्त में मौजूद ग्लूकोज को अवशोषित कर उसे ऊर्जा में परिवर्तित करती हैं. यदि यह प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने लगता है और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.
Myh7 जीन पर केंद्रित रहा शोध
वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में Myh7 नामक एक महत्वपूर्ण जीन का विश्लेषण किया. यह जीन शरीर की ‘स्लो-ट्विच’ मांसपेशियों के लिए आवश्यक प्रोटीन का निर्माण करता है. ये मांसपेशियां लंबे समय तक चलने, दौड़ने, शारीरिक संतुलन बनाए रखने और ऊर्जा के प्रभावी उपयोग में मदद करती हैं.
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में चूहों के शरीर से इस जीन को निष्क्रिय कर दिया. इसके बाद जो परिणाम सामने आए, उन्होंने शोधकर्ताओं को भी चौंका दिया.
प्रयोग के शुरुआती चरण में चूहों की मांसपेशियां सामान्य से बड़ी दिखाई दीं. हालांकि समय बीतने के साथ वे सिकुड़ने लगीं और उनकी ताकत में लगातार गिरावट आने लगी. वैज्ञानिकों ने पाया कि शरीर ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पा रहा था.
इसके साथ ही चूहों में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो गया, जो टाइप-2 डायबिटीज का प्रमुख कारण माना जाता है. जांच में यह भी सामने आया कि GLUT4 नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन का स्तर काफी कम हो गया था.
यह प्रोटीन रक्त में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने का कार्य करता है. इसकी कमी के कारण शरीर में शुगर नियंत्रण की प्रक्रिया प्रभावित हो गई और स्थिति टाइप-2 डायबिटीज जैसी बन गई.
माइटोकॉन्ड्रिया की खराबी से बढ़ा बीमारी का खतरा
शोध में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया. वैज्ञानिकों ने पाया कि Myh7 जीन की कमी से शरीर में हानिकारक फ्री रेडिकल्स का स्तर बढ़ने लगता है, जबकि NRF2 नामक एक महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट प्रोटीन का स्तर घट जाता है.
NRF2 शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने का काम करता है. इसकी कमी से कोशिकाओं के ऊर्जा केंद्र कहे जाने वाले माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचता है. जब माइटोकॉन्ड्रिया सही ढंग से काम नहीं करते, तो शरीर की इंसुलिन प्रणाली प्रभावित होने लगती है और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है.
ब्रोकली में मिला संभावित समाधान
शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने सल्फोराफेन (Sulforaphane) नामक प्राकृतिक यौगिक का उपयोग किया, जो ब्रोकली और उसके अंकुरों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.
प्रयोग में देखा गया कि सल्फोराफेन के उपयोग से NRF2 दोबारा सक्रिय हो गया. इसके परिणामस्वरूप माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता में सुधार हुआ और मांसपेशियों का चयापचय (मेटाबॉलिज्म) बेहतर होने लगा.
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दिशा में आगे और शोध होने पर टाइप-2 डायबिटीज के लिए नई उपचार पद्धतियां विकसित की जा सकती हैं.
जशपुर से अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच तक का सफर
जशपुर जिले के छोटे से गांव बागबहार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक शोध में महत्वपूर्ण योगदान देना डॉ. जयदीप शर्मा की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. उनकी यह सफलता न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है.
यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा, समर्पण और मेहनत के बल पर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले युवा भी विश्वस्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधानों में अपनी पहचान बना सकते हैं और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं.
भविष्य में बदल सकती है डायबिटीज उपचार की दिशा
भारत को दुनिया के उन देशों में गिना जाता है जहां डायबिटीज मरीजों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यह शोध चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मांसपेशियों की सेहत को बेहतर बनाए रखने और NRF2 पाथवे को सक्रिय करने वाली दवाएं विकसित की जाती हैं, तो भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज की रोकथाम और उपचार के लिए नए और अधिक प्रभावी विकल्प सामने आ सकते हैं.
डॉ. जयदीप शर्मा और उनकी टीम की यह खोज न केवल वैज्ञानिक जगत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि करोड़ों डायबिटीज मरीजों के लिए भी उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है.
तस्वीर-जयदीप शर्मा और वैज्ञानिक सैम जे. मैथ्यू