हाईकोर्ट में जींस-टीशर्ट पहनकर पहुंचे सीनियर अफसर, जज ने लगाई फटकार
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में हाल ही में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया, जहां कानून की बारीकियों पर नहीं, बल्कि पहनावे और अदालती शिष्टाचार पर तीखी बहस हो गई. भिलाई में तैनात एक सीनियर सरकारी अधिकारी को कोर्ट रूम में टी-शर्ट और जींस पहनकर पेश होना बेहद भारी पड़ गया. अधिकारी के इस कैजुअल लुक को देखकर हाईकोर्ट की बेंच का पारा चढ़ गया और उन्होंने अफसर को जमकर फटकार लगाई.
यह वाकया एक तय सुनवाई के दौरान हुआ. जैसे ही अधिकारी कोर्ट के सामने पहुंचे, पीठासीन न्यायाधीश उनके पहनावे को देखकर नाराज हो गए. कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अधिकारी के प्रोफेशनल एटीकेड (व्यावसायिक शिष्टाचार) पर सवाल उठाए.
माननीय अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा, "क्या आपको लगता है कि आप जैसे चाहें वैसे चले आ सकते हैं?" कोर्ट ने जोर देकर कहा कि कानूनी व्यवस्था की गरिमा बनाए रखने के लिए एक तय औपचारिक आचरण और पहनावे का पालन करना अनिवार्य है.
अदालत का गुस्सा सिर्फ कपड़ों तक ही सीमित नहीं रहा. सुनवाई के दौरान बेंच ने अधिकारी की प्रोफेशनल बैकग्राउंड पर भी तीखा सवाल दाग दिया. कोर्ट ने पूछा कि क्या वे एक "डायरेक्ट रिक्रूट" (सीधे भर्ती हुए) अधिकारी हैं या फिर "प्रमोटी" (पदोन्नति पाकर आए) हैं.
कोर्ट के इस सवाल के गहरे मायने थे, जिससे यह संकेत मिला कि अदालत को इस बात की चिंता है कि क्या प्रशासनिक प्रोटोकॉल और न्यायिक आचरण को लेकर अधिकारी को पर्याप्त ट्रेनिंग मिली भी है या नहीं.
यह पूरा घटनाक्रम छत्तीसगढ़ की नौकरशाही के लिए एक कड़ा संदेश है कि जब भी वे उच्च न्यायपालिका के सामने पेश हों, तो 'ड्रेस कोड' और 'आचार संहिता' का सख्ती से पालन करें. कानूनी कार्यवाही में औपचारिक पहनावा सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि संविधान और न्याय के मंदिर के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है.
इस मामले पर वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि भले ही अधिकारी राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करते हों, लेकिन उन्हें अदालत की गरिमा और गंभीरता का पूरा ख्याल रखना होगा.