राम मंदिर गबन मामले की तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
नई दिल्ली | डेस्क: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और अनियमितता का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है. हालांकि, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया.
कोर्ट ने कहा, "ऐसी क्या जल्दबाजी है, आसमान नहीं टूट पड़ेगा." अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले पर सुनवाई अवकाश समाप्त होने के बाद नियमित प्रक्रिया के तहत होगी.
उधर, सोमवार सुबह पुलिस की टीम जेल में बंद आठ आरोपियों के बैंक खातों की जांच के लिए अयोध्या स्थित एसबीआई समेत अन्य बैंक शाखाओं में पहुंची. करीब आधे घंटे तक खातों की पड़ताल करने के बाद टीम लौट गई. सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लॉकरों की भी जांच की जा सकती है. (इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.)
आठों आरोपियों को सोमवार को अदालत में पेश किया जाना है. पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो सकती है. पुलिस पूछताछ के लिए आरोपियों की रिमांड मांग सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित गबन या चोरी कब से और किस तरीके से की जा रही थी.
रविवार को पुलिस की आठ टीमों ने आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की थी. जांच के दौरान रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के घर से निवेश और खरीद से जुड़े दस्तावेज, आभूषण तथा नकदी बरामद होने का दावा किया गया. वहीं, आरोपी अनुकल्प मिश्रा के घर से एक डायरी मिली है. पुलिस को आशंका है कि इस डायरी से मामले से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं.
इधर, पुलिस ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बयान दर्ज कर लिया है. जांच एजेंसी का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य पदाधिकारियों, जिनमें अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, के बयान भी दर्ज किए जाएंगे.
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
वहीं, अयोध्या के कुछ स्थानीय वकीलों ने आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लिया है. उनका कहना है कि मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है. दूसरी ओर, बार एसोसिएशन की एक बैठक में कुछ वकीलों ने चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए चेतावनी दी कि तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं होने पर अयोध्या बंद और जाम का आंदोलन किया जाएगा.