SC: प. बंगाल के मदरसा शिक्षकों को सरकारी वेतन की मांग खारिज
नई दिल्ली । डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2026) को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए पश्चिम बंगाल के मान्यता प्राप्त मदरसों के 350 से अधिक शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की याचिकाओं को खारिज कर दिया है. याचिकाकर्ता राज्य सरकार की अनुदान सहायता योजना के तहत अपनी नियुक्तियों को नियमित करने और सरकारी खजाने से वेतन दिए जाने की मांग कर रहे थे.
न्यायधीश दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने 40 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी याचिकाकर्ता अदालत के समक्ष अपने मामले की योग्यता को साबित करने में सफल नहीं रहा. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह फैसला तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि पूरी तरह से मेरिट के आधार पर लिया गया है.
यह मामला पश्चिम बंगाल मदरसा सेवा आयोग अधिनियम, 2008 को कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद से जुड़ा हुआ है. 361 याचिकाकर्ताओं का दावा था कि इस अदालती फैसले के बाद उनकी नियुक्तियां विभिन्न मदरसों में की गई थीं.
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां इन नियुक्तियों की वैधता और संबंधित मदरसों की प्रबंध समितियों के अधिकारों पर सवाल उठाए गए थे.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि 14 मार्च, 2016 (जब शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाई थी) के बाद बिना कोर्ट की विशेष अनुमति के की गई सभी नियुक्तियां पूरी तरह से अवैध और गैर-टिकाऊ हैं. गौरतलब है कि 2023 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में इन नियुक्तियों को अमान्य ठहराया था, जिसे अब अदालत ने भी सही माना है.