छत्तीसगढ़ विधानसभा में वन-खनन विवाद पर बवाल
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार राज्य में बड़े पैमाने पर हो रहे खनन और वनों की कटाई पर चर्चा की मांग को अनुमति नहीं मिलने के बाद कांग्रेस विधायकों ने ज़ोरदार हंगामा किया. विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य की विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार "उद्योगपतियों और पूंजीपतियों के लाभ के लिए काम कर रही है."
कांग्रेस सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव के ज़रिए दावा किया कि सरगुजा, हसदेव अरण्य कोयला क्षेत्र, तमनार और बस्तर जैसे इलाकों में बड़े विरोध प्रदर्शन और सड़क जाम हो रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोयला खदानों की मंजूरी के लिए 'फर्जी जनसुनवाई' आयोजित की जा रही है.
विपक्ष ने रायगढ़ के तमनार क्षेत्र में अभूतपूर्व वनों की कटाई और वन एवं राजस्व भूमि पर बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जाने का आरोप लगाया. 'छत्तीसगढ़ के फेफड़े' कहे जाने वाले हसदेव अरण्य का हवाला देते हुए, कांग्रेस विधायकों ने कहा कि इस क्षेत्र में लाखों पेड़ों का नुकसान हुआ है, जिससे जैव विविधता, जल संसाधनों और हाथी गलियारों को गंभीर खतरा है.
उन्होंने चेतावनी दी कि निरंतर वनों की कटाई से मानव-हाथी संघर्ष बढ़ सकता है और पानी की कमी की स्थिति बिगड़ सकती है.
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि विष्णु देव साय सरकार वनों, वन्यजीवों, आदिवासियों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील है और उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है.
उन्होंने फर्जी जनसुनवाई, विरोध प्रदर्शन और लाठीचार्ज के दावों को खारिज कर दिया.
मंत्री कश्यप ने देहरादून स्थित भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) का हवाला देते हुए दावा किया कि छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र में 94.75 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है, जबकि 'वनों के बाहर वृक्षों' के तहत क्षेत्र में 702 वर्ग किमी की वृद्धि हुई है, जो देश में सबसे अधिक है.
उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में वन (संरक्षण) अधिनियम के तहत केवल पाँच खनन मामलों में 1300.869 हेक्टेयर वन भूमि को नियमों के अनुसार और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही डायवर्ट किया गया है.
उन्होंने यह भी कहा कि सभी वन भूमि डायवर्जन मामलों में क्षतिपूरक वनीकरण किया जा रहा है.मंत्री के जवाब के बाद, अध्यक्ष रमन सिंह ने स्थगन प्रस्ताव नोटिस को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद कांग्रेस सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और सदन के वेल में आ गए.
इसके बाद अध्यक्ष ने 30 कांग्रेस सदस्यों को निलंबित कर दिया, हालांकि कुछ ही मिनटों बाद निलंबन वापस ले लिया गया.