बस्तर में बढ़ते सड़क हादसे, 6 माह में 300 मौतें
बस्तर | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के बस्तर में लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं और इन सड़क हादसों में कई लोगों की जान भी जा रही है, लेकिन इन हादसों को रोकने के लिए बस्तर पुलिस और प्रशासन के पास कोई मास्टर प्लान नहीं है.
साल 2024 में ही बस्तर संभाग के 7 जिलों में 862 सड़क हादसे हुए हैं और इन हादसों में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. सबसे ज्यादा दुर्घटना राष्ट्रीय राजमार्गों में हुई है.
साल 2025 जनवरी से जून माह तक केवल 6 महीनों में बस्तर संभाग के 7 जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के आंकड़े 300 के पार पहुंच गए हैं. जिनमें सबसे ज्यादा मौतें बस्तर, कोंडागांव, कांकेर और बीजापुर जिले में हुईं
नेशनल हाइवे पर सबसे ज्यादा हादसबस्तर संभाग के अलग-अलग सातों जिलों में साल 2024 में 862 सड़क हादसे हुए हैं. इन हादसों में सैकड़ों लोगों की जानें गईं और एक हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं.
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि यह सड़क हादसे सबसे ज्यादा नेशनल हाईवे पर हुए हैं. इनमें टू व्हीलर, फोर व्हीलर, ट्रक और बस दुर्घटना शामिल हैं. बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर साल सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जाता है, ताकि लोगों को जागरूक किया जा सके.
आईजी ने बताया कि यातायात नियमों का पालन कराने के लिए सड़क सुरक्षा समिति का गठन कर समय-समय पर बैठक भी ली जाती है. कोशिश की जाती है कि बढ़ते हादसों को रोका जा सके, लेकिन यह पुलिस के लिए भी चिंता का विषय है कि हर साल सड़क हादसों का रिकॉर्ड बढ़ता ही जा रहा है.
बस्तर में 134 लोगों की गई जान
गौरतलब है कि बीते 6 माह के भीतर ही बस्तर जिले में 263 सड़क हादसे हुए हैं. जिसमें 134 लोगों की मौत हो गई और 200 से अधिक घायल हुए.
सबसे ज्यादा बस्तर जिले के अंतर्गत जगदलपुर रायपुर नेशनल हाईवे- 30 में सड़क हादसे हुए हैं. जिनमें कई लोगों की जान चली गई है.
इन हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार, नशा और सड़क किनारे अवैध पार्किंग बताई जा रही है.
बस्तर के एसपी सलभ कुमार सिन्हा के मुताबिक बस्तर जिले में ही हर दिन औसतन एक से अधिक सड़क हादसे हो रहे हैं. वहीं हर दूसरे दिन एक व्यक्ति की जान जा रही है. इन हादसों की सबसे बड़ी वजह तेज रफ्तार और चालकों की लापरवाही मानी जा रही है. कई मामलों में देखा गया है कि सड़क किनारे खड़े ट्रक या बस भी हादसे की वजह बनते हैं.
एसपी का कहना है कि हर साल लोगों को जागरूक करने जागरूकता अभियान चलाया जाता है. बाइक सवारों को हेलमेट की अहमियत बताई जाती है. साथ ही लापरवाही करने वालों का चालान भी काटा जाता है. लापरवाह लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि महज 6 माह में ही चालान से आई रकम लगभग 50 लाख रुपए से अधिक है. लापरवाही की वजह से हो रहे हादसों में जान जाने के बावजूद लोगों की लापरवाही नहीं थम रही है और सड़क हादसे बढ़ रहे हैं.
इन जिलों में सबसे ज्यादा हुई मौतें
केवल जगदलपुर- रायपुर नेशनल हाईवे में ही नहीं बल्कि जगदलपुर-बीजापुर नेशनल हाइवे, जगदलपुर सुकमा और जगदलपुर विशाखापट्नम नेशनल हाइवे में भी लगातार सड़क हादसे बढ़ रहे हैं.
खासकर जगदलपुर-रायपुर नेशनल हाईवे-30 में सवारी की होड़ में यात्री बसों की रफ्तार बेलगाम हो गई है, जिस वजह से आए दिन यात्री बस दुर्घटना की खबर आम बात हो चली है.
वहीं कुछ दिनों तक आरटीओ विभाग और यातायात विभाग के द्वारा खानापूर्ति के लिए नेशनल हाइवे में चालानी कार्रवाई तो की जाती है, लेकिन कुछ दिन बाद स्थिति जस की तस बन जाती है.