रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

IAEA में ईरान के खिलाफ प्रस्ताव: रूस, चीन और नाइजर ने किया विरोध

C

CG Khabar

11 जून 2026, 06:36 PM 4 मिनट में पढ़ें 2

IAEA
IAEA

वियना । डेस्क: ईरान के तेहरान टाइम्स के हवाले से खबर है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने ईरान के खिलाफ एक नया प्रस्ताव पारित किया है. बुधवार को हुए इस मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 21 वोट पड़े, जबकि तीन देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया और 10 देशों ने दूरी बनाए रखी. तेहरान और उसके सहयोगी देशों ने इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है. 


उन्होंने इसे पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित और जारी राजनयिक प्रयासों को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया है. इस प्रस्ताव में इस्लामी गणतंत्र ईरान से उन परमाणु केंद्रों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई है जो हाल ही में सैन्य हमलों का निशाना बने थे. साथ ही वहां भंडारित समृद्ध यूरेनियम के बारे में भी विवरण देने को कहा गया है.

विज्ञापन


हमलों के सच को छिपाने की कोशिश:


ईरानी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि यह मौजूदा संकट के असली कारणों को पूरी तरह से नजरअंदाज करता है. तेहरान का मानना है कि हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सुरक्षित परमाणु ठिकानों पर जो हमले किए गए, वे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन थे. 


यह प्रस्ताव उन हमलों के दोषियों पर बात करने के बजाय केवल उसके बाद पैदा हुई परिस्थितियों को लेकर ईरान पर दबाव बना रहा है. रूस की समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार, रूस, चीन और नाइजर ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान कर ईरान का खुलकर साथ दिया है.


महाशक्तियों का संयुक्त मोर्चा और कानूनी वैधता पर सवाल:


मतदान से ठीक पहले ईरान, चीन और रूस ने वियना में आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में एक संयुक्त बयान जारी किया था. तीनों देशों ने पश्चिमी देशों के समर्थन से तैयार इस मसौदे को सिरे से खारिज कर दिया और एजेंसी के राजनीतिकरण के खिलाफ सख्त चेतावनी दी. 


संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया कि परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत ईरान के दायित्वों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि उसकी अवधि 18 अक्टूबर 2025 को ही समाप्त हो चुकी है. 


इसके साथ ही ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों द्वारा 'स्नैपबैक तंत्र' को दोबारा लागू करने की कोशिशों को भी कानूनी रूप से अमान्य करार दिया गया.


आईएईए की साख पर मंडराता खतरा:


संयुक्त बयान में आईएईए के महानिदेशक की हालिया रिपोर्टों को भी राजनीतिक प्रकृति का बताते हुए उनकी आलोचना की गई है. ईरान और उसके सहयोगियों का कहना है कि इस तरह के रवैये से परमाणु मुद्दे का कोई शांतिपूर्ण और बातचीत के जरिए समाधान निकलना मुश्किल हो जाएगा. 


बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि एनपीटी के तहत सभी सदस्य देशों को बिना किसी भेदभाव के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा पर अनुसंधान और उत्पादन करने का पूरा अधिकार है. सुरक्षित परमाणु केंद्रों पर लगातार हो रहे हमलों को वैश्विक परमाणु सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक अभूतपूर्व चुनौती बताया गया है.


विदेशी साजिश और जवाबदेही का उलटा खेल:


ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मतदान से पहले आईएईए बोर्ड के सदस्य देशों को पत्र लिखकर अपील की थी कि वे इस वैश्विक संस्था को अमेरिका के हाथों का खिलौना न बनने दें. उन्होंने याद दिलाया कि जून 2025 में भी आईएईए ने ईरान के खिलाफ ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया था, जिसके ठीक 24 घंटे बाद अमेरिकी और इजरायली हमलों ने ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया था. 


वहीं ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया पर इस कदम को हमलावरों को बचाने का एक खतरनाक प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने खुद परमाणु केंद्रों पर हमले करके आईएईए के निरीक्षकों को देश छोड़ने पर मजबूर किया और अब वे अपनी ही गलतियों का ठीकरा ईरान पर फोड़कर जवाबदेही को उलटने का खेल खेल रहे हैं.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP