प्रख्यात इकोलॉजिस्ट माधव गाडगिल का पुणे में निधन
पुणे । डेस्क: भारत के सुप्रसिद्ध पारिस्थितिकी विज्ञानी माधव गाडगिल का बुधवार देर रात पुणे में उनके आवास पर संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 82 वर्ष के थे. उनके पुत्र सिद्धार्थ गाडगिल ने गुरुवार को उनके निधन की पुष्टि की.
गाडगिल को मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के संरक्षण पर उनकी क्रांतिकारी रिपोर्ट और जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के लिए जाना जाता है. साल 2024 में संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें पर्यावरण के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' से नवाजा था.
पुणे में जन्मे और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से 'मैथमेटिकल इकोलॉजी' में पीएचडी करने वाले गाडगिल ने 1983 में भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) में 'सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज' की स्थापना की थी.
उनके लंबे और प्रतिष्ठित करियर में उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया. उनके पिता धनंजय गाडगिल एक विख्यात अर्थशास्त्री थे, जबकि उनकी दिवंगत पत्नी सुलोचना गाडगिल मानसून की विशेषज्ञ थीं.
माधव गाडगिल का सबसे महत्वपूर्ण योगदान पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) के अध्यक्ष के रूप में उनकी रिपोर्ट रही, जिसमें उन्होंने संवेदनशील क्षेत्रों में खनन और अवैध निर्माण पर सख्त प्रतिबंधों की सिफारिश की थी.
पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए एक 'आधुनिक वैज्ञानिक और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का संरक्षक' बताया.
गाडगिल ने जैविक विविधता अधिनियम 2003 और वन अधिकार अधिनियम 2006 को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनके निधन पर राकांपा (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले सहित कई नेताओं और पर्यावरणविदों ने गहरा शोक व्यक्त किया है.