स्कूली पाठ्यक्रमों से मुगल काल को हटाना गलत: रोमिला थापर
कोझिकोड । डेस्क: प्रख्यात इतिहासकार रोमिला थापर ने स्कूली पाठ्यक्रमों से मुगलों को हटाए जाने की कड़ी आलोचना करते हुए इसे "बेतुका" करार दिया है. केरल लिटरेचर फेस्टिवल के नौवें संस्करण में ऑनलाइन संबोधन के दौरान 94 वर्षीय थापर ने स्पष्ट किया कि इतिहास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है जिसे टुकड़ों में नहीं पढ़ाया जा सकता.
उन्होंने कहा कि लोगों, संस्कृतियों और सोचने के तरीकों का विकास एक क्रमिक विकास है, और किसी खास कालखंड को हटा देने से इतिहास की निरंतरता टूट जाती है, जिसका कोई तार्किक अर्थ नहीं निकलता.
गौरतलब है कि एनसीईआरटी ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए कक्षा 7 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव करते हुए दिल्ली सल्तनत और मुगलों से संबंधित अध्यायों को हटा दिया है, जिसके संदर्भ में थापर की यह टिप्पणी आई है.
उन्होंने सोशल मीडिया पर फैल रहे "लोकप्रिय इतिहास" के प्रति भी सचेत किया और लोगों से आग्रह किया कि वे ऐतिहासिक तथ्यों के लिए केवल पेशेवर इतिहासकारों के शोध पर ही भरोसा करें.
अपने संबोधन में उन्होंने नारीवादी इतिहास के महत्व और महिलाओं की स्वायत्तता पर जोर देते हुए कहा कि समाज के लिए एक स्वतंत्र सोच वाली महिला का होना अनिवार्य है. इस सत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नारीवादी इतिहास लिखना ही काफी नहीं है, बल्कि स्वतंत्र सोच और बौद्धिक स्वतंत्रता के साथ व्यवहार करना भी उतना ही जरूरी है.