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जर्मनी में 41.3 डिग्री सेल्सियस के साथ टूटा गर्मी का रिकॉर्ड

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27 जून 2026, 06:47 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

गर्मी-लू
गर्मी-लू

नई दिल्ली । डेस्क: यूरोप में जारी जानलेवा हीटवेव का कहर अब और खतरनाक रूप ले चुका है. फ्रांस और ब्रिटेन के बाद अब जर्मनी में भी गर्मी ने अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. जर्मनी के सारब्रुकन शहर के पास शुक्रवार को रिकॉर्ड 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो देश के इतिहास में अब तक का सबसे अधिक तापमान है. 


मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यह हीटवेव अब तेजी से पोलैंड और मध्य यूरोप की तरफ बढ़ रही है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं.


इस जानलेवा गर्मी ने पूरे पश्चिमी यूरोप में भारी तबाही मचाई है, जहां अब तक दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है. अकेले फ्रांस में ही भीषण लू के कारण कई मौतों की पुष्टि हुई है, जिसके बाद प्रशासन को स्कूलों को बंद करने, बाहरी आयोजनों को स्थगित करने और शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने जैसे कड़े कदम उठाने पड़े हैं.


चरमराया बुनियादी ढांचा और परिवहन सेवाएं


इस रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी का सीधा असर सार्वजनिक व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर पड़ा है. अत्यधिक तापमान के कारण रेल पटरियों के मुड़ने और सड़कों के धंसने का खतरा पैदा हो गया है. इसे देखते हुए जर्मनी के राष्ट्रीय रेल ऑपरेटर 'ड्यूश बान' ने यात्रियों को अगले सप्ताह की शुरुआत तक अपनी लंबी दूरी की टिकटें मुफ्त में रद्द करने की अनुमति दे दी है. 


इसके अलावा, रविवार को फ्रैंकफर्ट में होने वाली प्रतिष्ठित 'आयरनमैन यूरोपियन चैंपियनशिप' ट्रायथलॉन के साइक्लिंग और रनिंग ट्रैक को भी गर्मी के कारण छोटा करना पड़ा है.


क्या है इस भीषण गर्मी की वजह?


रॉयटर्स क्लाइमेट मॉनिटर के अनुसार, यूरोप में इस समय तापमान सामान्य से लगभग 18 डिग्री सेल्सियस अधिक चल रहा है. इस असामान्य गर्मी के पीछे 'ओमेगा ब्लॉक' (Omega Block) नामक वेदर पैटर्न को जिम्मेदार माना जा रहा है, जो एक बड़े इलाके में गर्म हवा के गुंबद (डोम) को कैद कर देता है. 


इसके अलावा, उत्तरी यूरोप के घर सर्दियों के लिहाज से गर्मी को रोकने के लिए बनाए जाते हैं, जिससे अब घरों के भीतर का तापमान असहनीय हो गया है और एशियाई एयर कंडीशनर (AC) व पंखों की मांग में अचानक भारी उछाल आया है.


जलवायु परिवर्तन का सीधा असर


विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के मुताबिक, महीने के अंत तक यह हीटवेव बाल्कन देशों की ओर रुख करेगी. वैज्ञानिकों का स्पष्ट कहना है कि मानव जनित जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के बिना इस तरह की भीषण गर्मी का होना लगभग असंभव था. 


ग्लोबल वार्मिंग के कारण ही आज रात का तापमान दो दशक पहले की तुलना में 100 गुना अधिक गर्म और संभावित हो गया है. हालांकि, जर्मनी में रविवार को भारी आंधी-तूफान की आशंका जताई गई है, जिससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है.


गर्मी से यूरोप में मौतें


यूरोप में जून 2026 में आई इस विनाशकारी और रिकॉर्ड-तोड़ हीटवेव के कारण अब तक पूरे महाद्वीप में 530 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO), राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रभावित देशों में मौतों की स्थिति इस प्रकार है:


स्पेन: 

इस हीटवेव में सबसे अधिक तबाही स्पेन में देखी गई है, जहां मृत्यु दर निगरानी प्रणाली के वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य आंकड़ों के अनुसार अब तक 327 लोगों की समय से पहले मौत हो चुकी है. यहां तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है.


फ्रांस: 

फ्रांस में गर्मी के कारण स्वास्थ्य प्रणाली पर अत्यधिक दबाव है और वहां अब तक 182 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. इसमें कार में बंद होने के कारण हाइपरथर्मिया का शिकार हुए चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, भीषण गर्मी से राहत पाने के चक्कर में फ्रांस में कम से कम 55 लोगों की डूबने से भी मौत हुई है.


यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन): 

ब्रिटेन में जून के महीने में इतिहास का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया, जिसने स्वास्थ्य आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी. आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, यहां अब तक भीषण गर्मी के चलते 21 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. लंदन एम्बुलेंस सेवा को एक ही दिन में रिकॉर्ड तोड़ आपातकालीन कॉल्स का सामना करना पड़ा है.


इटली और जर्मनी: 

इटली में केवल 24 घंटों के भीतर ही 5 लोगों की मौत की खबर सामने आई, जिनमें मिलान के पास खेत में काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं. वहीं जर्मनी में भी, जहां पारा 41.3 डिग्री सेल्सियस के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, दर्जनों मौतों को इस जानलेवा वेदर पैटर्न से जोड़कर देखा जा रहा है.


वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वास्तविक मौतों का सटीक सांख्यिकीय विश्लेषण करने में अभी कुछ समय और लगेगा, क्योंकि अत्यधिक उमस और गर्मी के कारण दिल और सांस से जुड़ी बीमारियों से होने वाली मौतों का डेटा बाद में पूरी तरह स्पष्ट हो पाता है. फिलहाल यह हीटवेव तेजी से पोलैंड और मध्य यूरोप की तरफ बढ़ रही है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ गया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP