राजनांदगांव: दिव्यांगजन 'साइट सुपरवाइजर' बनकर कर रहे निगरानी
राजनांदगांव । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले ने ग्रामीण रोजगार और समावेशी विकास के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है. जिले में दिव्यांगजनों (दिव्यांग व्यक्तियों) को केवल कल्याणकारी योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें मुख्यधारा के ग्रामीण प्रशासन से जोड़कर सशक्त बनाया जा रहा है.
'विकसित भारत जी-राम-जी' (VBGRAMG) योजना के तहत 85 दिव्यांगजनों को प्रशिक्षित कर साइट सुपरवाइजर के रूप में तैनात किया गया है.
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर शारीरिक रूप से कठिन कार्यों के कारण दिव्यांगजनों के लिए आजीविका के अवसर सीमित रहते थे. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, लगभग 70 प्रतिशत दिव्यांगजन ग्रामीण इलाकों में निवास करते हैं. इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए राजनांदगांव जिला प्रशासन ने उनकी शारीरिक क्षमताओं के अनुसार कार्य आवश्यकताओं में बदलाव कर एक अनूठी पहल शुरू की है.
इस पहल के तहत अब ये 85 दिव्यांगजन ग्रामीण अवसंरचना परियोजनाओं को संचालित कर रहे हैं. वे कार्यस्थलों पर फीता लेकर माप ले रहे हैं, दर्जनों मजदूरों का नेतृत्व कर रहे हैं, दैनिक मस्टर रोल का सत्यापन कर रहे हैं और जियो-टैग्ड प्रगति रिपोर्ट अपलोड कर गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित कर रहे हैं.
राजनांदगांव के कलेक्टर जितेंद्र यादव के अनुसार, यह कदम केंद्र और राज्य सरकार की अंतिम व्यक्ति तक अधिकार पहुंचाने की सोच के अनुरूप है, जिसके तहत दिव्यांगजनों की क्षमताओं के हिसाब से काम के अनुकूल नियम तय किए गए हैं.
वहीं, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों और उनके परिवारों को सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे वे अपने समुदाय के विकास में सक्रिय भागीदार बन सकें.