राजस्थान विधानसभा में 'दो छिपे' कैमरों पर विवाद गहराया
जयपुर । डेस्क: राजस्थान विधानसभा में दो 'छिपे- अतिरिक्त' कैमरों को लेकर चल रहा राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा द्वारा विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद यह मामला तूल पकड़ चुका है.
विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व ने इस मुद्दे पर राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े को एक ज्ञापन सौंपा. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, विपक्ष के नेता टीका राम जुल्ली और पीसीसी प्रमुख डोटासरा ने इस मामले को लगातार उठाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है.
गहलोत ने मीडिया से कहा, "देखिए, उन्होंने दो अतिरिक्त कैमरे लगाए हैं, जो विधानसभा की कार्यवाही के लाइव प्रसारण के लिए उपयोग होने वाले सामान्य कैमरों से अलग हैं. इन अतिरिक्त कैमरों का नियंत्रण विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में है. केवल अध्यक्ष या उनके निजी स्टाफ ही इन कैमरों के माध्यम से देख या सुन सकते हैं."
विपक्ष के नेता जुल्ली ने अलग से बताया, "ये दो कैमरे, जिनकी कीमत विधानसभा को 18.46 लाख रुपये पड़ी, हाल ही में खरीदे गए हैं. ये पुराने कैमरे नहीं हैं, जैसा कि अध्यक्ष देवनानी ने दावा किया. विधानसभा द्वारा ऑर्डर किए गए अपग्रेडेड कैमरे अभी डिलीवर नहीं हुए हैं. ये कैमरे वास्तव में 18.46 लाख रुपये की नई खरीद हैं."
जुल्ली ने आगे आरोप लगाया कि विधानसभा के अधिकारी "सबूत नष्ट करने" और दस्तावेजों में हेरफेर करने में व्यस्त हैं.
हालांकि, डोटासरा ने इस मामले को और तीखा करते हुए आरोप लगाया, "ये कैमरे केवल कांग्रेस पर नजर रखने के लिए लगाए गए थे, खासकर हममें से तीन-चार लोगों पर, जिसमें हमारी महिला विधायकों को भी निशाना बनाया गया. अध्यक्ष अपनी रेस्ट रूम से महिला विधायकों को देखना चाहते थे- वे कैसे कपड़े पहनती हैं, कैसे बैठती हैं, क्या बात करती हैं."
डोटासरा ने अध्यक्ष पर भेदभाव का भी आरोप लगाया, दावा किया कि वे सत्ताधारी पक्ष के सदस्यों का पक्ष लेते हैं और विपक्ष को निशाना बनाते हैं.
जवाब में, विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने एक लोकप्रिय कहावत का हवाला दिया: "जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी."
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी, "यह कांग्रेस नेता की संकीर्ण मानसिकता और बीमार सोच को दर्शाता है. लोगों के मुद्दों को उठाने के बजाय, वे वोट-उन्मुख राजनीति में लिप्त हैं. जहां तक महिलाओं की सुरक्षा के आरोपों का सवाल है, मैंने सदन में कभी असहज महसूस नहीं किया."
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने डोटासरा पर तीखा हमला बोला, उन्हें "चरित्रहीन" करार दिया और उनके "खराब रिकॉर्ड" का हवाला दिया. उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी सार्वजनिक आयोजनों में अभद्रता का आरोप लगाया.
खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा और शहरी विकास मंत्री झब्बर सिंह खर्रा ने डोटासरा की टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा की: "उनका आचरण और बयान एक निर्वाचित प्रतिनिधि के लिए अनुचित हैं. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के उच्च संवैधानिक पद का सम्मान नहीं किया."
इस बीच, बीजेपी के कई नेताओं, जिनमें प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ शामिल हैं, ने डोटासरा की टिप्पणियों को विधानसभा के मर्यादा का घोर उल्लंघन बताया.
अजमेर में, जहां स्पीकर देवनानी का गृहनगर है, बीजेपी कार्यकर्ताओं ने डोटासरा की टिप्पणियों के खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्होंने गांधी सर्किल पर एक जुलूस निकाला और डोटासरा का पुतला जलाया.