हजार करोड़ की धोखाधड़ी में रायपुर का कारोबारी दिल्ली से गिरफ्तार
रायपुर । संवाददाता: कोलकाता पुलिस ने करीब 1,000 करोड़ रुपये के कथित बड़े वित्तीय घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर के निवासी महेंद्र गोयनका को दिल्ली से हिरासत में लिया है. आरोपी पिछले करीब डेढ़ से दो साल से लगातार फरार चल रहा था और इस दौरान मध्य प्रदेश पुलिस की गिरफ्त से भी बाहर था. जांच एजेंसियों ने अब उसकी गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य किरदारों की तलाश तेज कर दी है.
इस मामले की जड़ें फर्जीवाड़े और कंपनियों के अवैध नियंत्रण से जुड़ी हैं. जांच में सामने आया है कि जालसाजी और जाली हस्ताक्षरों के सहारे कई पारिवारिक कंपनियों पर कब्जा जमाने का प्रयास किया गया था.
इसी शिकायत के आधार पर कोलकाता में भारतीय न्याय संहिता और भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी तथा आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा कायम किया गया था, जिसके बाद यह गिरफ्तारी मुमकिन हो सकी.
इसके अलावा, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की मुंबई पीठ ने भी 9 मई 2025 को दिए अपने एक फैसले में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका के वित्तीय लेन-देन को लेकर सख्त टिप्पणियां की थीं.
आरोपी का नाता पहले मध्य प्रदेश के एक रसूखदार राजनीतिक परिवार से जुड़ी कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से रहा है, जहां वह सीनियर मैनेजमेंट के पद पर कार्यरत था. उस दौरान कंपनी की संपत्तियों और माल की बिक्री में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर के आरोप लगे हैं.
इतना ही नहीं, उनकी एक अन्य फर्म निसर्ग इस्पात में भी वित्तीय अनियमिताओं की जांच अलग-अलग स्तरों पर चल रही है.
महेंद्र गोयनका की मुश्किलें सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं हैं. मध्य प्रदेश के कटनी जिले में भी उनके खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जालसाजी के दो अलग-अलग आपराधिक केस दर्ज हैं.
इस मामले में संलिप्त उनके कुछ सहयोगियों ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत से उनकी अग्रिम जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं. फिलहाल पुलिस इस पूरे सिंडिकेट और पैसों के लेन-देन के स्रोतों को खंगालने में जुटी है, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.