रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

क्लाउड स्टोरेज की सुरक्षा पर सवाल, क्या लौटेंगे CD/DVD?

C

CG Khabar

25 अक्टू. 2025, 08:57 AM 2 मिनट में पढ़ें 1

CD/DVD
CD/DVD

नई दिल्ली । डेस्क: सिनेमा और संगीत से लेकर महत्वपूर्ण डेटा तक, आज आम जनता सब कुछ क्लाउड पर जमा कर रही है. लेकिन इस डिजिटल स्टोरेज डिवाइस की सुरक्षा कितनी पुख्ता है? क्या इसके माध्यम से गोपनीयता का अधिकार सुरक्षित रह सकता है? इन सवालों ने तकनीकी जगत में हलचल मचा दी है. विश्लेषकों ने इस बहस के बीच पुराने ज़माने की सीडी (CD) या डीवीडी (DVD) के फिर से बाज़ार में लौटने की बात कही है.


तकनीकी विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि क्लाउड जैसे स्टोरेज डिवाइस में गोपनीय जानकारी सुरक्षित नहीं रहती, क्योंकि इसका नियंत्रण उपयोगकर्ता के हाथ में नहीं होता. यही वजह है कि उनका मानना है कि आने वाले दिनों में सीडी या डीवीडी जैसे डिवाइस तेज़ी से बाज़ार में वापसी करेंगे. उनका तर्क है कि इन उपकरणों से ग्राहक के महत्वपूर्ण डेटा को चुराना न केवल मुश्किल है, बल्कि एक तरह से असंभव भी है.

विज्ञापन


क्लाउड में उपयोगकर्ता का सारा डेटा सर्वर पर रहता है, जिसके कारण साइबर अपराधियों की नज़र पड़ने का ख़तरा बना रहता है. इसके विपरीत, सीडी या डीवीडी ग्राहक की अपनी संपत्ति होती है. इसमें रखे डेटा को उपयोगकर्ता के अलावा किसी और के लिए मिटाना या चुराना संभव नहीं है. 


दूसरा बड़ा अंतर यह है कि क्लाउड पूरी तरह से इंटरनेट पर निर्भर है. अगर उसमें कोई समस्या आती है, तो ग्राहक उस डिवाइस में रखे डेटा तक नहीं पहुँच सकता. जबकि सीडी या डीवीडी को ऑफलाइन (बिना इंटरनेट) भी आसानी से चलाया जा सकता है.


तीसरा, क्लाउड ख़र्च के मामले में काफी महंगा है क्योंकि इस स्टोरेज डिवाइस का उपयोग करने के लिए किराया देना पड़ता है. सीडी या डीवीडी के मामले में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है. 


इसके अलावा, सीडी/डीवीडी जैसे हार्डवेयर को दीर्घकालिक (लॉन्ग-टर्म) स्टोरेज कहा जा सकता है, जिसमें ग्राहक 20 से 30 वर्षों तक डेटा को सुरक्षित रख सकते हैं. वहीं, क्लाउड के मामले में सर्वर के नष्ट हो जाने के ख़तरे को कोई भी खारिज़ नहीं कर रहा है.


हालांकि, सीडी या डीवीडी को नए सिरे से बाज़ार में वापस लाने में कई चुनौतियाँ हैं. इसके लिए उपयोगकर्ताओं को सीडी प्लेयर या डीवीडी प्लेयर की आवश्यकता होगी. नए कंप्यूटर या लैपटॉप में इस सिस्टम को इंस्टॉल करना होगा, जो काफी महंगा हो सकता है. ऐसे में निर्माण कंपनियाँ इस राह पर चलेंगी या नहीं, इस पर अभी भी संदेह बना हुआ है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP