फार्मेसियों में CCTV अनिवार्य: नशीली दवाओं के दुरुपयोग रोकने
नई दिल्ली । डेस्क: बच्चों में नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने के लिए देशभर की फार्मेसियों और केमिस्ट दुकानों में अब सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा. यह नया नियम राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और नारको समन्वय केंद्र के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है.
इस पहल का उद्देश्य शेड्यूल एच, एच1 और एक्स श्रेणी की दवाओं की बिक्री को नाबालिगों तक पहुंचने से रोकना है. शेड्यूल एच दवाएं केवल पंजीकृत चिकित्सक के नुस्खे पर बेची जा सकती हैं, जबकि शेड्यूल एच1 में कुछ विशेष एंटीबायोटिक्स, नशे की लत पैदा करने वाली दवाएं और टीबी-रोधी दवाएं शामिल हैं.
शेड्यूल एक्स दवाएं, जैसे एम्फेटामाइन, बार्बिट्यूरेट्स और कुछ नारकोटिक्स, नशे की उच्च संभावना वाली दवाएं हैं.
2018 में भारत में मादक पदार्थों के उपयोग के पैटर्न और सीमा पर किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, 10-17 वर्ष की आयु के लगभग 20 लाख बच्चे गैर-चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए सेडेटिव्स का उपयोग करते हैं.
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि इस आयु वर्ग के लगभग 40 लाख बच्चे ओपिओइड्स का उपयोग करते हैं, हालांकि फार्मास्यूटिकल ओपिओइड्स का विशिष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.
यह सर्वेक्षण सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय ड्रग डिपेंडेंसी ट्रीटमेंट सेंटर के माध्यम से जारी किया गया था और यह बच्चों में मादक पदार्थों के उपयोग पर नवीनतम व्यापक राष्ट्रीय डेटा है.
इस नई निगरानी व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य कोडीन आधारित कफ सिरप (शेड्यूल एच1), अल्प्राजोलम टैबलेट और ट्रामाडोल कैप्सूल (शेड्यूल एक्स) जैसी दवाओं के दुरुपयोग को रोकना है, जो बच्चों में नशे के लिये आमतौर पर उपयोग की जाती हैं.
इस निर्देश के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इन नियंत्रित पदार्थों की बिक्री पर सख्ती से निगरानी करने का आग्रह किया गया है.