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विधानसभा चुनावों के बाद चौथी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

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25 मई 2026, 03:14 AM 3 मिनट में पढ़ें 2

पेट्रोल-डीजल
पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली/रायपुर । संवाददाता: देश में विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद आम जनता पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है. तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने सोमवार को एक बार फिर ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है. इस ताजा संशोधन के तहत पेट्रोल के दाम में 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम में 2.71 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया है. 


पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में यह ईंधन की कीमतों में चौथी बड़ी बढ़ोतरी है.

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इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दर 92.49 रुपये से बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है. 


गौरतलब है कि एक लंबे समय तक कीमतों में कोई बदलाव न होने (फ्रीज) के बाद 15 मई से जब दोबारा रेट रिवीजन शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल मिलाकर लगभग 7.5 रुपये प्रति लीटर की संचयी वृद्धि हो चुकी है.


क्यों बढ़ रहे हैं दाम? क्या शेयर मार्केट की तरह रोज बदलेंगे भाव?


आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पेट्रोल और डीजल के दाम अब शेयर बाजार के सूचकांक की तरह रोज-बरोज घटते-बढ़ते रहेंगे? तकनीकी रूप से भारत में 'डायनेमिक प्राइसिंग' यानी रोजाना कीमतों की समीक्षा की व्यवस्था लागू है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर रोज सुबह दाम तय होते हैं.


हालांकि, पिछले कुछ महीनों से इस व्यवस्था पर अघोषित रोक लगी हुई थी, लेकिन अब यह दोबारा पूरी तरह सक्रिय हो गई है. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (जैसे ONGC और BPCL) के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 65-70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर सीधे 110-115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. 


पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है. इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने से तेल कंपनियों की आयात लागत काफी बढ़ गई थी, जिससे कंपनियों को रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ रहा था. इसी घाटे की भरपाई के लिए अब कीमतों में लगातार बदलाव देखा जा रहा है.


छत्तीसगढ़ में सिर्फ महंगाई नहीं, डीजल की किल्लत से किसान परेशान


ईंधन की आसमान छूती कीमतों के बीच, छत्तीसगढ़ में जमीनी स्तर पर एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है. राज्य के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग सहित कई जिलों के पेट्रोल पंपों पर इन दिनों डीजल की भारी किल्लत (कमी) का अहसास हो रहा है. आलम यह है कि कई इलाकों में पंपों के बाहर 'नो स्टॉक' के बोर्ड लटक गए हैं और जो पंप चालू हैं, वहां वाहनों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं.


छत्तीसगढ़ में इस समय खेती-किसानी और अगली फसल की तैयारियों का सीजन शुरू हो चुका है. ऐसे में डीजल की इस भारी किल्लत ने किसानों की कमर तोड़ दी है. ट्रैक्टरों, सिंचाई पंपों और थ्रेशर जैसी कृषि मशीनों को चलाने के लिए किसानों को डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनका काम ठप होने की कगार पर है. 


दुर्ग के धमधा जैसे क्षेत्रों में तो डीजल संकट के कारण ट्रांसपोर्टिंग पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे किसानों की तैयार पपीते जैसी फसलें मंडियों तक नहीं पहुंच पा रही हैं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. बढ़ती कीमतों के साथ-साथ डीजल की इस कमी ने छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और कृषि इलाकों में हाहाकार मचा दिया है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP