छत्तीसगढ़ के दलित की मॉब लिंचिंग-दस हजार पोस्टमॉर्टम किये, इतनी बर्बरता नहीं देखी- डॉक्टर
दस हजार पोस्टमॉर्टम किये इतनी बर्बरता नहीं देखी- डॉक्टर
पालक्काड । डेस्क: केरल के पालक्काड जिले के वालायर में छत्तीसगढ़ से काम की तलाश में आए दलित प्रवासी मजदूर राम नारायण की भीड़ द्वारा की गई हत्या की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने घटना की भयावहता उजागर कर दी है. त्रिशूर सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुए पोस्टमॉर्टम में डॉक्टर ने बताया कि मृतक के शरीर का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं था, जिस पर चोट न हो.
पसलियां चकनाचूर थीं, रीढ़ की हड्डी टूटी हुई थी और अधिकतर चोटें डंडों से मारने के कारण आई थीं. डॉक्टर के अनुसार, मौत के बाद भी उस पर हमला जारी रखा गया.
पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टर हितेश शंकर ने कहा कि उन्होंने 10 हजार से अधिक पोस्टमॉर्टम किए हैं, लेकिन इतनी बर्बरता पहले कभी नहीं देखी. रिपोर्ट के मुताबिक, राम नारायण की मौत गंभीर सिर की चोट के कारण हुई.
राम नारायण अपने पीछे पत्नी, दो छोटे बच्चों और मां को छोड़ गए हैं. वे करीब एक सप्ताह पहले वालायर आए थे और अपने चचेरे भाई ससीकांत से मिलने के साथ काम की तलाश कर रहे थे. ससीकांत के अनुसार, राम नारायण परिवार से दूर रहने में कठिनाई महसूस कर रहे थे और 17 दिसंबर को घर लौटने के लिए रेलवे स्टेशन निकले थे. 18 दिसंबर को पुलिस से उनकी मौत की सूचना मिली.
घटना के बाद केरल में मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे साधारण अपराध बताने की कोशिशों का आरोप लगाते हुए इसे आधिकारिक तौर पर “मॉब लिंचिंग” के रूप में दर्ज करने की मांग की है. त्रिशूर में हुए विरोध प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि इस घटना ने केरल की सामूहिक चेतना को झकझोर दिया है और राज्य में नफरत का माहौल खतरनाक रूप ले रहा है.
परिजनों और कार्यकर्ताओं ने साफ किया है कि जब तक मामले को मॉब लिंचिंग के रूप में दर्ज नहीं किया जाता और उचित मुआवजा घोषित नहीं होता, तब तक शव को गांव नहीं ले जाया जाएगा. उन्होंने राज्य सरकार से न्याय, सम्मान और 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है, साथ ही शव को छत्तीसगढ़ ले जाने का खर्च सरकार से उठाने की अपील की है.
इस मामले में पुलिस ने अब तक पांच आरोपियों अनु (38), प्रसाद (34), मुरली (38), आनंदन (55) और बिपिन (30) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. दो आरोपियों का पूर्व में भी हिंसक मामलों से संबंध रहा है.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने विशेष जांच टीम गठित करने और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यह घटना केवल एक हत्या नहीं, बल्कि नफरत और सामूहिक हिंसा की राजनीति का खतरनाक उदाहरण है.