बल्क ड्रग पार्क्स की धीमी प्रगति पर संसदीय समिति सख्त, मांगी विस्तृत रिपोर्ट
नई दिल्ली । डेस्क: देश में फार्मास्युटिकल क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने और बल्क ड्रग्स (एपीआई) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई बल्क ड्रग पार्क योजना की प्रगति को लेकर संसद की रसायन एवं उर्वरक संबंधी स्थायी समिति ने कड़ी नाराजगी जताई है. समिति ने फार्मास्युटिकल विभाग (DoP) को 6,306 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली तीन स्वीकृत बल्क ड्रग पार्क परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, अब तक हुई भौतिक व वित्तीय प्रगति और निर्माण में आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर अविलंब एक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं.
संसद में प्रस्तुत अपनी 34वीं रिपोर्ट में संसद सदस्य कीर्ति आजाद झा की अध्यक्षता वाली समिति ने विभाग द्वारा पहले दी गई प्रतिक्रिया पर असंतोष व्यक्त किया. समिति ने कहा कि विभाग ने अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में केवल यह लिखकर औपचारिकता पूरी कर दी थी कि 'सिफारिशों को अनुपालन के लिए नोट कर लिया गया है'. समिति के अनुसार, योजना के विशाल पैमाने, इसकी भारी लागत और देश की औषधि सुरक्षा के लिहाज से इसका जवाब पूरी तरह से असंतोषजनक है.
संशोधित समयसीमा के पालन पर जोर
समिति ने इस बात पर चिंता जताई कि DoP ने नई समयसीमा के पालन के लिए उठाए गए ठोस कदमों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है. इसके मद्देनजर संसदीय पैनल ने अपनी पुरानी सिफारिश को दोहराते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश के नक्कापल्ली, गुजरात के भरूच और हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में बनने वाले तीनों पार्कों को चालू करने के लिए तय संशोधित समयसीमा का सख्ती से पालन किया जाए.
क्या है बल्क ड्रग पार्क योजना और इसका बजट?
केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं के माध्यम से देश में बल्क ड्रग्स के विनिर्माण की लागत को कम करना और भारत की आयात पर निर्भरता घटाना है.
कुल परियोजना लागत: 6,306.68 करोड़ रुपये से अधिक.
केंद्रीय सहायता: प्रत्येक पार्क में कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी (CIF) के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपये तक की सहायता का प्रावधान है.
समयसीमा: यह योजना वित्त वर्ष 2020-21 से वित्त वर्ष 2026-27 की अवधि के लिए लागू की जा रही है.
उपलब्ध सुविधाएं: पार्कों में एपीआई विनिर्माताओं को रियायती दरों पर भूमि, बिजली, पानी, अपशिष्ट उपचार संयंत्र (CETP), भाप, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वेयरहाउस सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं. इसके अलावा, पीएलआई योजना के उत्पादों को भूमि आवंटन में प्राथमिकता दी जा रही है.
तीनों राज्यों में पार्कों की वर्तमान स्थिति
1. गुजरात (भरूच)
जंबूसर, भरूच में 2,015.02 एकड़ में बन रहे इस पार्क की कुल लागत 2,507.02 करोड़ रुपये है, जिसमें से 1,457.01 करोड़ रुपये कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटी के लिए हैं. यहां सड़क, जल निकासी, पानी और अपशिष्ट एकत्रण प्रणाली से जुड़े नागरिक अवसंरचना टेंडर आवंटित किए जा चुके हैं और काम अंतिम चरण में है. इसके अलावा, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) और सॉल्वेंट रिकवरी से जुड़े टेंडरों का क्रियान्वयन जारी है.
2. आंध्र प्रदेश (अनाकापल्ली)
नक्कापल्ली में 2,001.80 एकड़ क्षेत्र में बन रहे पार्क की कुल लागत 1,876.66 करोड़ रुपये (CIF के लिए 1,438.89 करोड़ रुपये) है. आंतरिक सड़कों, बिजली, पानी और उपयोगिता भवनों के टेंडर दिए जा चुके हैं. परियोजना की बाड़ लगाने का काम पूरा हो गया है, बाहरी पानी की पाइपलाइन बिछाई जा रही है और बिजली के बुनियादी ढांचे के डिजाइन को मंजूरी मिलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.
3. हिमाचल प्रदेश (ऊना)
हरोली, ऊना में 1,405.01 एकड़ में 1,923 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहे इस पार्क के लिए सड़क, जल निकासी, पुल और जल अवसंरचना के टेंडर दिए जा चुके हैं. जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) सुविधाओं, CETP और स्टीम जनरेशन सिस्टम के लिए टेंडर आमंत्रित किए जा चुके हैं. वर्तमान में भूमि समतलीकरण और सीमांकन का काम चल रहा है.