जिन्ना का राज छुपाने वाले मुंबई के 2 डॉक्टरों को पाकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान
नई दिल्ली । डेस्क: पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की गंभीर बीमारी की बात को गोपनीय रखने के लिए मुंबई के पारसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले दो डॉक्टरों (एक फिजिशियन और एक रेडियोलॉजिस्ट) को पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-इम्तियाज' दिया जाएगा. पाकिस्तान सरकार के संघीय मंत्री अहसान इकबाल ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा की.
नागरिक और सैन्य पुरस्कारों की समिति के अध्यक्ष और योजना मंत्री अहसान इकबाल ने बताया कि 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नामांकनों की घोषणा के दौरान इन दोनों डॉक्टरों को नामांकित किया गया. इकबाल के अनुसार, 1947 में विभाजन के समय यदि जिन्ना के स्वास्थ्य की गिरती हालत सार्वजनिक हो जाती, तो पाकिस्तान का निर्माण प्रभावित हो सकता था.
इतिहासकारों के हवाले से मंत्री ने कहा कि यह 20वीं सदी के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण रहस्यों में से एक था. अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भी बाद में यह स्वीकार किया था कि यदि उन्हें जिन्ना की गंभीर बीमारी के बारे में पता होता, तो वे देश के विभाजन का फैसला कुछ समय के लिए टाल सकते थे, जिससे इतिहास की दिशा बदल सकती थी.
अहसान इकबाल ने कहा कि इन डॉक्टरों ने अपने पेशेवर गोपनीयता के कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन किया, जिससे अनजाने में ही सही, पाकिस्तान के गठन में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई गई. हालांकि, मंत्री ने दोनों डॉक्टरों के नामों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है.
पाकिस्तान में इन सम्मानों का ऐलान 14 अगस्त को किया जाता है और इन्हें अगले वर्ष 23 मार्च को 'पाकिस्तान दिवस' पर राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से प्रदान किया जाता है. जिन्ना तपेदिक (टीबी) की बीमारी से पीड़ित थे, जो उस दौर में असाध्य थी, और पाकिस्तान बनने के एक साल बाद ही उनका निधन हो गया था.