महाराष्ट्र में 'ऑपरेशन टाइगर' पूरा हुआ
मुंबई । डेस्क: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बहुत बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को अब तक का सबसे तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि उनके गुट के सभी 6 लोकसभा सांसदों ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है. शिवसेना (यूबीटी) के इन सांसदों ने पाला बदलकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल होने का पूरा मन बना लिया है.
रविवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संयुक्त रूप से इस राजनीतिक घटनाक्रम की सफलता की घोषणा की, जिसे पर्दे के पीछे 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया गया था.
रविवार शाम को इस घटनाक्रम पर मुहर लगाते हुए उपमुख्यमंत्री शिंदे ने बेहद आत्मविश्वास के साथ कहा कि जो लोग उन्हें जानते हैं, वे अच्छी तरह समझते हैं कि वह किसी भी ऑपरेशन को अधूरा नहीं छोड़ते. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने चुटकी लेते हुए कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' पूरी तरह सफल रहा है और अब शरीर बिल्कुल स्वस्थ है.
अंदरूनी सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) के सभी 6 सांसदों ने पहले ही एक अलग गुट बनाने के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और इस सिलसिले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात भी कर चुके हैं.
कानूनन, कुल 9 सांसदों में से 6 के अलग होने के कारण यह संख्या दो-तिहाई बहुमत की सीमा को पार कर जाती है, जिससे इन सांसदों पर दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए जाने का कोई खतरा नहीं रहेगा.
पाला बदलने वाले इन प्रमुख चेहरों में हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टिकर, धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर, संजय दीना पाटिल, संजय जाधव, संजय देशमुख और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल हैं.
बगावत करने वाले सांसदों में से नागेश पाटिल आष्टिकर और ओमराजे निंबालकर ने रविवार को सार्वजनिक रूप से अपने फैसले की घोषणा की. दोनों नेताओं ने पार्टी छोड़ने के पीछे अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कोष की भारी कमी और उद्धव गुट के वरिष्ठ नेताओं के अपमानजनक व्यवहार को मुख्य वजह बताया.
सांसद आष्टिकर ने एक भावुक वीडियो बयान जारी कर कहा कि 18 जून तक उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया था, लेकिन उनके खिलाफ जिस तरह की अपमानजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया गया, उसी के बाद वे कदम उठाने पर मजबूर हुए. उन्होंने कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि उन्होंने अपनी विचारधारा नहीं छोड़ी है, बल्कि वे असली शिवसेना में जा रहे हैं.
वहीं, धाराशिव में अपने कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में बैठक करने के बाद सांसद ओमराजे निंबालकर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह फैसला किसी पद या पैसे के लालच में नहीं लिया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि चाहे कोई उनके खिलाफ कितना भी बोले, वे ठाकरे परिवार के आवास 'मातोश्री' के खिलाफ कभी एक शब्द भी नहीं कहेंगे.
इस भारी राजनीतिक उठापटक के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई नॉर्थ ईस्ट में एक सार्वजनिक रैली के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला. उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना ने दशकों तक कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई लड़ी, लेकिन कांग्रेस ने कभी भी उनकी पार्टी को इस तरह तोड़ने की कोशिश नहीं की.
उन्होंने इसे पूरी तरह से भाजपा का "पाप" करार दिया. अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए उद्धव ठाकरे 26 से 29 जून तक महाराष्ट्र के छह अलग-अलग क्षेत्रों का दौरा करने वाले हैं, जिसमें विशेष रूप से उन बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं जो एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल होने जा रहे हैं.
बहरहाल, सोमवार को इन छह में से कम से कम तीन सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में बड़ी रैलियां कर शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक पारा और चढ़ना तय माना जा रहा है.