बदल गया सैलरी स्ट्रक्चर, अब CTC का 50% होगा बेसिक पे
कोलकाता । डेस्क: केंद्र सरकार ने श्रम कानून में बड़ा बदलाव करते हुए एक नई अधिसूचना जारी की है, जिसमें निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन ढांचे को लेकर चार नए नियम बताए गए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से कर्मचारियों के हाथ में आने वाला वेतन कम हो जाएगा, हालांकि इसके साथ ही उनका भविष्य निधि का कोष काफी बढ़ जाएगा.
नए श्रम कानून की अधिसूचना के तहत, अब निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के कुल कॉस्ट टू कंपनी (CTC) का 50% हिस्सा अनिवार्य रूप से बेसिक पे होना चाहिए. अभी तक ज्यादातर कंपनियां CTC का लगभग 25% ही बेसिक पे रखती थीं.
उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी का वार्षिक CTC ₹12 लाख है, यानी मासिक आय ₹1 लाख है. पुराने नियम के तहत, यदि उसका बेसिक पे ₹25,000 था, तो नियोक्ता ईपीएफ (EPF) और ग्रेच्युटी के लिए लगभग ₹3,000 और विभिन्न भत्तों के लिए ₹72,000 देता था.
लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद, इसी कर्मचारी का बेसिक पे बढ़कर अनिवार्य रूप से ₹50,000 हो जाएगा (कुल CTC का 50%). इसके परिणामस्वरूप, पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी मद में ₹6,000 और भत्ते के रूप में ₹44,000 मिलेंगे.
मूल वेतन में यह वृद्धि कई कर्मचारियों को आयकर (Income Tax) के दायरे में ला सकती है.
इसके अलावा, बेसिक पे बढ़ने के कारण कर्मचारी को प्रोविडेंट फंड में भी अधिक राशि का योगदान करना होगा.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के अनुसार, मूल वेतन का 12% अनिवार्य रूप से पीएफ में जमा करना होता है, और नियोक्ता को भी उतनी ही राशि जमा करनी पड़ती है.
इस दोहरे प्रभाव से, महीने के अंत में कर्मचारियों के हाथ में पहले की तुलना में कम पैसा आएगा, लेकिन उनका भविष्य निधि कोष तेजी से बढ़ेगा, जो उनके भविष्य के लिए एक मजबूत बचत के रूप में काम करेगा.